







बीकानेर Abhayindia.com विद्युत विनियामक आयोग के फैसले पर सामाजिक कार्यकर्ता चौरू लाल सुथार ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अखबारों में बिजली सस्ती की वाहवाही लूटकर बिजली के बिल ज्यादा आएगा के फार्मूले पर कहा कि आयोग के प्रस्ताव में सबसे बड़ी बात पहली बार लगा रेगुलेटरी सरचार्ज है जो एक रुपया प्रति यूनिट होगा। सुथार ने कहा कि जहां 150 से 300 यूनिट्स तक रेट यूनिट 1.35 पैसे कम की गई है वही स्थाई शुल्क 400 से 500 रुपया कर दिया गया है। वहींं, 300 से 500 यूनिट्स तक रेट प्रति यूनिट 0.65 पैसे घटाई गई है जबकि स्थाई शुल्क 400 से 500 रुपया किया गया है और 500 से अधिक यूनिट्स खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट रेत 0.45 पैसे कम की गई है वहींं, इस स्लैब में स्थाई शुल्क की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 450 से 800 रुपया यानी सीधे ही 350 रुपया बढ़ा दिए गए है।
सुथार ने कहा कि जिन स्लैबों में प्रति यूनिट दर घटाई गई है उनका हम फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन, इसके उलट जिन स्लैबों में स्थाई शुल्क में बढ़ोतरी कर आम उपभोक्ता की जेब पर सीधा सीधा बोझ बढ़ा दिया गया है। क्या सरकार के इस गणित के मक्कड़जाल से उपभोक्ताओं को फायदा हुआ है या घाटा। लेकिन सरकार के इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को बजाय लाभ के घटा ही हुआ है। करना तो ये चाहिए था कि प्रति यूनिट रेट कम करने के साथ साथ प्रत्येक स्लैबों में पुराने लागू स्थाई शुल्क की दर कम कर लोगो को राहत दी जाती लेकिन ऐसा नही कर उसके उलट प्रति यूनिट की कुछेक स्लैबों में दर कम कर लोगों को सस्ती बिजली की टॉफी देकर दूसरी तरफ स्थाई शुल्क में बेहताशा बढ़ोतरी कर आमजन की जेबें खाली करने का काम किया है। जबकि बार बार स्थाई शुल्क घटाने के लिए आमजन सरकार से गुहार लगाते रहे है।
उन्होंने बताया कि ये सब खेल विद्युत विभाग को हो रहे घाटे को पूरा करने के लिए किया गया है। कारण सरकार विद्युत चोरी व छीजत रोकने में असफल रही है जिसका सीधा सीधा खामियाजा उन विद्युत उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा जो कभी चोरी नही करते व नियत तिथि से पहले विद्युत बिल की राशि विभाग को जमा करवाते है। सरकार का सीधा सीधा सा आंकड़ा है कि स्थाई शुल्क बढ़ाने से उपभोक्ताओं के हिसाब से उनके खाते में स्थाई शुल्क के रूप में बढ़ाई गई बहुत बड़ी रकम आ जायेगी जिससे विभाग को हो रही चोरी व छीजत से हो रहे नुकसान से सीधे तौर पर भरपाई संभव हो सकेगी। क्योंकि यूनिट्स उपभोग से तो एक साथ इतना पैसा मिलना संभव नही है इसलिए सीधे उपभोक्ताओं की संख्या के हिसाब से स्थाई शुल्क में बढ़ोतरी कर घाटे/नुकसान को पाटने की कोशिश की गई है। केवल इससे घाटा पूरा नहीं होगा घाटा तो तब पूरा होगा जब विद्युत चोरी व छीजत पर पूरी तरह से सख्ती से अंकुश लगेगा।
सुथार ने बताया कि निर्णय तो सरकार को यह लेना चाहिए था कि बिजली दरों में कमी के साथ साथ फिक्स्ड चार्जेज को भी कम किया जाता तो बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलती लेकिन इधर बिजली दरों में कुछ कमी करके फिक्स्ड चार्जेज में बढ़ोतरी कर दूसरे हाथ से लोगों से पैसा खींच कर बिजली घाटे को पाटने का काम किया है। अब तो पी.एम. सूर्या योजना के तहत घर घर सोलर पैनल स्थापित भी हो रहे है व राजस्थान में बहुत बड़े पैमाने पर सोलर पैनलों से बिजली का जबरदस्त उत्पादन भी हो रहा है ऐसे में सरकार को बिजली की दरों में कमी करनी चाहिये न कि दरें बढानी चाहिए।सरकार से आग्रह है कि अगर आमजन को राहत देनी ही है तो यूनिट दरों के साथ साथ स्थाई शुल्क में भी दर घटाई जाए तभी जाकर लोगों को राहत मिलेगी नहीं तो आंकड़ों के इस मक्कड़जाल से लोगों को राहत देने की बजाय उन पर पहले से ज्यादा बोझ डालने का काम किया है।






