Saturday, May 16, 2026
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चेक अनादरण के मामले में न्‍यायालय ने अभियुक्‍त को किया दोषसिद्ध

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बीकानेर Abhayindia.com न्यायालय विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण न 1) बीकानेर ने धारा 138 पराक्रम्य लिखित अधिनियम में ₹5000 का चेक देने वाले अभियुक्त लिखमाराम को दोष सिद्ध किया है।

मामले के अनुसार, अभियुक्त लिखमाराम ने प्रतिष्ठान पानमल सेठिया से दिनांक 09.5.2019 को ₹5000 का कपड़ा खरीद उसको चुकाने के लिए एक चेक दिया जिसको परिवादी प्रतिष्ठान पान मल सेठिया ने अपनी बैंक में प्रस्तुत किया लेकिन अभियुक्त लिखमाराम के खाते में अपर्याप्त राशि होने के कारण चेक अनादरित हो गया। उसके बाद प्रतिष्ठान पानमल सेठिया ने जरिए अधिवक्ता 20.07.2019 को अभियुक्त के सही पते पर विधिक नोटिस भेजा गया। इसके बाद भी अभियुक्त ने उक्त राशि का भुगतान नहीं किया तो परिवादी प्रतिष्ठान पानमल सेठिया ने न्यायालय में मुकदमा दायर किया। न्यायालय ने धारा 138 पराक्रम्य लिखित अधिनियम के तहत अभियुक्त लिखमाराम पुत्र रामचन्द्र हाल निवासी गुड़ा तहसील कोलायत को दोषसिद्ध किया एवं तुरन्त कारावास से दण्डित किए जाने की बजाय अपराधी परीवीक्षा अधिनियम 1958 की धारा 4 का लाभ देते हुए आदेश दिया गया कि यदि अभियुक्त एक साल के लिए ₹10000 का स्वयं का बंध पत्र व इसी कदर राशि की जमानत इस आशय की पेश कर तस्दीक करा दें कि वह भविष्य में अपराध की पुनरावृत्ति नहीं करेगा, वह सदाचार व शांति बनाई रखेगा। न्यायालय द्वारा उसे सजा भुगतने के लिए आहूत करने पर वह स्वयं न्यायालय में उपस्थित होगा तो उसे सदाचार की परीवीक्षा पर स्वतंत्र कर दिया जावे अपराधी परीवीक्षा अधिनियम की धारा 5 के तहत अभियुक्त पर रुपए 10000 की राशि का प्रतिकार अधिरोहित किया गया। अभियुक्त द्वारा प्रतिकर की राशि न्यायालय में जमा कराए जाने पर उक्त प्रतिकर की राशि बाद गुजरने में मियाद अपील व निगरानी परिवादी को नियमानुसार अदा की जावे। परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता राधेश्याम सेवग व मुकुल तिवाडी ने की है।

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