शौरीपुरी नगरी बना पौषधशाला, 22वें तीर्थंकर प्रभु श्री नेमिनाथ ने लिया जन्म

Neminath Abhinandan
Neminath Abhinandan

बीकानेर Abhayindia.com  घंटे की टंकोर और नगाड़ों की थाप बज रही थी, घनघोर बिजली चमक रही थी और इंद्र का सिंहासन भी डगमगा गया। यह दृश्य था 22वें तीर्थंकर प्रभु श्री नेमिनाथ के जन्मकल्याणक उत्सव का। रविवार को रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में देवलोक की दिव्य प्रस्तुति में नेमिनाथ भगवान के जन्म की कथा का नाट्यपूर्वक मंचन किया गया। पौषधशाला को शौरीपुरी नगरी का रूप दिया गया। साध्वी सौम्यप्रभा, साध्वी सौम्यदर्शना साध्वी अक्षयदर्शना, साध्वी परमदर्शना के सान्निध्य में कार्यक्रम का शुभारम्भ अमित कोचर व रौनक कोचर ने नवकार मंत्र, गुरु स्तुति एवं भजनों की प्रस्तुति से किया। 64 इंद्रों के साथ सुरेन्द्र-कुसुम बद्धाणी ने अच्युतपति इंद्र व इंद्राणी, सौधर्म इंद्र की पारस-दिव्या कोचर एवं शिवामाता की भूमिका रश्मि सिपानी ने निभाई।

साध्वी सौम्यप्रभा ने कहा कि 22वें तीर्थंकर प्रभु श्री नेमिनाथ के जन्म के समय सौधर्मी इंद्र का सिंहासन भी डगमगा गया और उसे क्रोध आया कि ऐसा कौन है जिसके कारण कंपन हो रहा है। सौधर्मी इंद्र को अवधिज्ञान से पता चला कि 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ भगवान ने जन्म लिया है तो वे स्वयं शौरीपुरी नगरी शिवा माता के पास गए और उन्हें निद्रा के वश में करके भगवान को अपनी गोद में पांच रूप बनाकर उन्हें अपने साथ लेकर मेरुपर्वत पर गए जहां अच्युतपति इंद्र ने उनका अभिषेक किया। साध्वी सौम्यप्रभा ने कहा कि तीर्थंकर का अभिषेक करने से हमारे भवोभव सुधर जाते हैं। देवलोक की दिव्य प्रस्तुति कार्यक्रम का संचालन जितेन्द्र कोचर ने किया तथा रूपरेखा, निर्देशन, साज-सज्जा कोचर फ्रेंड्स क्लब के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई। अप्सराओं व इंद्र-इंद्राणी के नृत्यों की प्रस्तुतियों एवं अन्य तैयारियों में ज्योति कोचर, प्रेक्षा कोचर, सुषमा कोचर, निकिता बैद, रुचि पुगलिया के निर्देशन में की गई। कार्यक्रम में साधार्मिक वात्सल्य का लाभ लेने वाले मुख्य लाभार्थी मूलचंद पुष्पादेवी, सुरेन्द्र-कुसुम, ईशु बद्धाणी परिवार का अभिनंदन श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ श्री संघ के अध्यक्ष रिखबचंद सिरोहिया, विजय कुमार कोचर एवं लीलम सिपानी द्वारा किया गया। लीलम सिपानी परिवार की ओर से प्रभुश्री नेमिनाथ भगवान के जन्म पर बधाइयां बांटी गई।