अद्र्धशुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी बीजों का होगा परीक्षण…

बीकानेरAbhayindia.com इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फोर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (इक्रीसेट) की ओर से विकसित गुणवत्तायुक्त बीजों का बीकानेर एवं आसपास के क्षेत्र में उपयोगिता के दृष्टिकोण से परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण उपरांत सर्वश्रेष्ठ पाई जाने वाली किस्मों का लाभ किसानों को मिल सकेगा।

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय तथा इक्रीसेट के बीच इस संबंध में करार (एमओयू) हुआ है। एमओयू की यह कार्यवाही ऑनलाइन माध्यम पर हुई। एमओयू पर इक्रीसेट की महाप्रबंधक डॉ. जैकलीन हग्स तथा कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने हस्ताक्षर किए। प्रो. सिंह ने बताया कि यह करार एक वर्ष की अवधि के लिए किया गया है।

इस एमओयू के बाद इक्रीसेट की ओर से विकसित बीजों का परीक्षण बीकानेर में भी हो सकेगा। परीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि इक्रीसेट की ओर से विकसित बीज बीकानेर और आसपास के क्षेत्रो के लिए अनुकूल हैं अथवा नहीं। क्षेत्र के अनुकूल पाई जाने वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनके उपयोग से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।

उन्होंने बताया कि इक्रीसेट की ओर से कृषि अनुसंधान विशेषकर बाजरा की अन्तरराष्ट्रीय किस्मों पर सतत अनुसंधान किया जाता है। अनुसंधान निदेशक डॉ. पी. एस. शेखावत ने बताया कि इक्रीसेट का मुख्यालय तेलंगाना के पतंचेरु में है। वहां पर भारत के अलावा केन्या, जिम्बावे, मोजम्बिक, इथोपिया, माली और नाइजीरिया के अर्द्धशुष्क क्षेत्रों के लिए बीज विकसित किए जाते हैं।

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