Friday, May 15, 2026
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बरसाती पानी जा रहा पाकिस्तान, हक से वंचित हमारे किसान, विधानसभा में विधायक भाटी ने उठाया मुद्दा

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बीकानेर Abhayindia.com राजस्‍थान विधानसभा सत्र के दौरान कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने कहा कि 90 के दशक के बाद से पौंग बांध के अन्दर पूरा पानी नहीं भरा जा रहा है। इस कारण मानसून के समय बरसाती पानी पाकिस्तान जा रहा है। वहीं, बीकानेर, बाड़मेर व जैसलमेर के टेल पर बैठे किसानों का हक मारा जा रहा है। साथ ही हमें बी.बी.एम.बी. के माध्यम से यह बात उठानी चाहिये।

भाटी ने कहा कि इंगांनप में फील्ड स्टाफ जैसे बेलदार, मेट, जिलेदार, गेज रीडर के 97 प्रतिशत पद खाली हैं, जो 3 प्रतिशत पद बचे हैं वो भी 2026 में रिक्त हो जायेंगे, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां कर पदों को भरने की कार्यवाही करने की बात विधानसभा में रखी।

विधायक भाटी ने कहा कि गर्मी के समय विद्युत आपूर्ति में होने वाली बाधा से बचने के लिए एक मॉडल के रूप में एक स्थान चिन्हित कर वहां पर पूरा का पूरा तंत्र सोलर पर आधारित हो, जो नेट मीटरिंग के माध्यम से जो भी अतिरिक्त बिजली हो, उसको फीडर में डाले। इससे सरकार को राजस्व की आय भी होगी और जनता को पूरा हक का पानी मिलेगा।

विधायक भाटी ने पीएचईडी की राइजनिंग लाईन को तोड़कर व नहर में अवैध मोघे व साईफन लगाकर पानी चोरी के मुद्दे को भी उठाया। भाटी का कहना था कि सरकार के करोड़ों रूपये व्यय करने के बावजूद अन्तिम छोर पर बैठे हुए किसान को उनके हिस्से का पानी नहीं पहुंच रहा है। भाटी ने राजस्थान इरिगेशन एण्ड ड्रेनेज एक्ट 1990 की धारा 55 में ऐसे लोगों पर गैर जमानती मुकदमा दर्ज करने व पीएचईडी एक्ट में संशोधन कर 7 वर्ष कैद व एक लाख रूपये जुर्माना लगाने का सुझाव दिया। भाटी ने कहा इससे अपराधियों में भय व्याप्त होगा।

भाटी ने छपनिया काल के समय हमारे पूर्वजों ने यातनाऐं झेली लेकिन जीवन को संरक्षित रखा। जीवन संरक्षित रहा आठ हजार साल से चली आ रही फूलप्रुफ व्यवस्था में कुऐं, जोहड़, पायतान, बावड़ी, बैरी, टोबा आदि से सीमित प्राकृतिक संसाधनों का प्रबन्ध व संरक्षण किया जिससे ये रेगिस्तान दूनिया का एक मात्र जीवित रेगिस्स्तान कहलाया। हमारा प्रबन्धन पूरी दुनिया में एक मिसाल बना लेकिन कालान्तर में हम पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करने लगे जिनका खुद की व्यवस्था नकारा हो चुकी है। महाराजा गंगासिंहजी सीमित संसाधनों के बावजूद रेगिस्तान के सीने को चिरते हुए नहर ले आये थे आज हमारे पास संसाधन है लेकिन मात्र 5 से 10 किमी. दूर पानी पहुंचाने में हमें दिक्कत आ रही है।

भाटी ने कहा अगर ऐसे ही चलता रहा तो संकट और गहरा जायेगा। भाटी ने बरसाती जल के संचयन के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई।

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