






बीकानेर Abhayindia.com सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्त्ता और अधिवक्ता नीतू जैन ने राज्य सरकार द्वारा जयपुर के एसएमएस (SMS) मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक दक्षता बढ़ानेके लिए आईएएस अधिकारी नियुक्त करने के निर्णय का स्वागत किया है। इसके साथ ही, उन्होंने बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज (SPMC) और पीबीएम अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने के लिए यहाँ भी तत्काल प्रभाव से प्रशासनिक अधिकारियों (IAS/RAS) की नियुक्ति की मांग उठाई है।
इस संबंध में एडवोकेट नीतू जैन ने आज माननीय मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री और मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार को एक विस्तृत पत्र प्रेषित किया है। एडवोकेट नीतू जैन ने कहा कि “चिकित्सा एक ‘नोबल प्रोफेशन’ है। डॉक्टर्स ने अपनी पूरी जिंदगी चिकित्सा विज्ञान पढ़ने और मरीजों की जान बचाने में खपा दी होती है। उन्हें अस्पताल के टेंडर, निर्माण कार्य, और क्लर्की (Clerical) कार्यों में उलझाना न केवल उनकी प्रतिभा का अपमान है, बल्कि यह मरीजों के अधिकारों का हनन भी है।”
अपने पत्र में मानवाधिकार कार्यकर्त्ता नीतू जैन ने तर्क दिया है कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन रक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार देता है। जब विभाग के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी डॉक्टर्स (जो प्रिंसिपल या अधीक्षक के पद पर होते हैं) अपना अधिकांश समय प्रशासनिक बैठकों और फाइलों को निपटाने में लगा देते हैं, तो मरीजों को उनकी विशेषज्ञता का लाभ नहीं मिल पाता। यह परोक्ष रूप से ‘राइट टू हेल्थ’ का उल्लंघन है।
पत्र में की गई प्रमुख मांगें...
1. कार्य विभाजन : बीकानेर मेडिकल कॉलेज और पीबीएम अस्पताल में प्रबंधन, वित्त और सामान्य प्रशासन का जिम्मा विशेष रूप से प्रशिक्षित प्रशासनिक अधिकारियों (IAS या वरिष्ठ RAS) को सौंपा जाए।
2. डॉक्टर्स की मुक्ति : वरिष्ठ डॉक्टर्स को प्रशासनिक बोझ से मुक्त कर उन्हें केवल चिकित्सा, शोध (Research) और शिक्षण कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने दिया जाए।
3. प्रशासनिक दक्षता : जिस तरह प्रशासन का अनुभव रखने वाले अधिकारी व्यवस्थाओं को बेहतर संभाल सकते हैं, उसी तरह डॉक्टर्स मरीजों को। इसलिए दोनों का कार्यक्षेत्र अलग होना जनहित में अनिवार्य है।


