छोटे पशुओं का उपचार है कठिन, वेटरनरी में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित…

बीकानेर Abhayindia.com वेटरनरी विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान एवं एलेम्बिक फार्मास्यूटिकल्स के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘श्वानों और बिल्लियों की पीडियाट्रिक अवस्था में चिकित्सकीय स्वास्थ्य प्रबंधन और व्यवहारिक दृष्टिकोण के पहलू’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि वेबिनार का विषय सामयिक है। श्वान बिल्ली जैसे पालतु पशुओं के पालन के प्रति समाज में रूझान तेजी से बढ़ रहा है। इनके स्वास्थ्य प्रबंधन और उपचार तकनीकों में विशेषज्ञता के साथ ही सामुदायिक प्रयासों की भी जरूरत है।

केरल वेटरनरी एण्ड एनीमल साईंस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. एम.आर. सशीन्द्रनाथ ने कहा कि श्वान प्रजनकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। श्वान व बिल्ली पालकों में रोग निदान व उपचार के लिए विशेषज्ञ सेवाओं की मांग बढ़ी है।

डॉ. ए.के. गहलोत ने कहा कि श्वान व बिल्ली जैसे छोटे पशुओं में रोग निदान व उपचार सेवाएं एक कठिन कार्य है। भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. जे.पी. वार्ष्णेय ने कहा कि श्वान व बिल्लियों के जन्म की प्रारंभिक अवस्थाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के साथ ही अन्य अंगों का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता अत: इस अवस्था में अत्यधिक संक्रमण की संभावना रहती है और मृत्युदर भी अधिक होती है।

बाल्यावस्था में विशेष देखभाल के लिए कोलेस्ट्रम फीडिंग, सही ताप नियंत्रण, संतुलित पोषण एवं उपयुक्त टीकाकरण पर ध्यान देना जरूरी है। स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, जयपुर की अधिष्ठाता प्रो. संजीता शर्मा, डॉ. धर्मसिंह मीणा आदि ने विचार रखे।

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