Friday, May 15, 2026
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बीकानेर में “अभिलेखीय दस्तावेज : उनका प्रबंधन और इतिहास लेखन में भूमिका” विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का आगाज

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बीकानेर Abhayindia.com राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर की ओर से सोमवार को राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के परिसर में “अभिलेखीय दस्तावेज : उनका प्रबंधन और इतिहास लेखन में भूमिका” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारम्भ मां सरस्वती का दीप प्रज्जवलित कर सरस्वती वंदना एवं वन्दे मातरम् के गायन के साथ हुआ।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि जेठानंद व्यास, वि़धायक (बीकानेर पश्चिम), विशिष्ट अतिथि कुमार महेश, सचिव, कला साहित्य-संस्कृति, खादी व ग्राम इण्डस्ट्रीज विभाग, दिल्ली सरकार, मुख्य वक्ता प्रो. दलजीत सिंह, विभागाध्यक्ष (इतिहास व इतिहास केन्द्र), पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला, चन्द्रसेन सिंह शेखावत, निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार एवं डॉ बसंत सिंह सोलंकी, सहायक निदेशक, अभिलेखागार रहे।

मुख्य अतिथि जेठानन्द व्यास ने अभिलेखागार की महता और इसकी उपयोगिता के बारे में बताया की इतिहास के संबध में किसी भी विमर्श का समाधान अभिलेखों के माध्यम से ही मिल सकता है। उन्होने महाराजा गंगासिंह की दूरदर्शिता गंगनहर निर्माण एवं गंगारिसाला के बारे में विस्तार से बताया।

विशिष्ट अतिथि कुमार महेश ने गजेटीयर यूपीएससी, अभिलेख व्यवस्था, प्रशिक्षण कार्यक्रम, गैर व्यवसायी संस्थान, डिजिटल रिकोर्ड, निजी अभिलेख आदि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी और देश के सभी अभिलेखागारों के निदेशकों को बीकानेर अभिलेखागार का निरीक्षण कर यहां की अभिलेख व्यवस्था को अपनाने का सुझाव भी दिया।

मुख्य वक्ता दलपत सिंह ने राजपूत सिख संबंध बन्दासिंह बहादुर के पत्राचार, महाराजा भूपेन्द्र सिंह व गंगासिंह के मध्य गंगनहर के संबध में जो पत्राचार हुआ, अखबारे दरबार आदि के बारे में बताया। निदेशक, शेखावत ने सभी का स्वागत करते हुए अभिलेखागार के बारे में बताया। सेमीनार के संयोजक सोलंकी ने दो दिवसीय सेमीनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। हरिमोहन मीना ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में दो तकनीकी सत्र हुए। जिसमें डिजिटलाईजेशन, बजट, भविष्य का अभिलेखागार, मारवाडी व्यापार और व्यापारी, राष्ट्रीय एकीकरण, प्रतापगढ प्रजामण्डल, संस्थान स्मृतियां और ऐतिहासिक प्रबन्ध विशेष रूप से बीकानेर अभिलेखागार के सन्दर्भ में, वैश्विक पैरवी के अभिलेखीय निशान, राजपूताना में रियासतों की समस्याओं का अन्तरीयकरण, अभिलेखीय स्त्रोतों के माध्यम से पश्चिमी हिमालय में हासिये पर रहने वाले लोगों की आवाज, अभिलेखागार और हासिये पर रहने वाले लोगों की आवाजें आदि विषयों पर तकनीकी सत्र में व्याख्यान हुए।

कार्यक्रम में डॉ. चन्द्रशेखर कच्छावा, सुखाराम, नितिन गोयल, राजेन्द्र कुमार, कुमार रामकृष्णा, डॉ फारूख चैहान, पंकज थानवी, राजशेखर, मोहर सिंह मीना सहित विभाग कर्मचारीगण उपस्थित रहें। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों द्वारा अभिलेखागार का अवलोकन किया और अभिलेख प्रबन्धन की प्रशंसा की।

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