






जयपुर Abhayindia.com राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष संजीव प्रकाश शर्मा के प्रेरणादायी संरक्षण, सानिध्य तथा नेतृत्व में एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2025 की चतुर्थ राष्ट्रीय लोक अदालत का 19 दिसंबर को राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ में तथा 21 दिसंबर को प्रदेश के समस्त जिला एवं मजिस्ट्रेट विचारण न्यायालयों, अधिकरणों, आयोगों, उपभोक्ता मंचों, राजस्व न्यायालयों आदि में आयोजन किया गया।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव न्यायाधिपति हरि ओम अत्री ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ में न्यायाधिपति संजीव प्रकाश शर्मा ने अन्य न्यायाधिपतिगण की गरिमामयी उपस्थिति में रालसा एवं रजिस्ट्री के पदाधिकारी, अधिवक्ता, पक्षकार, कर्मचारी एवं विधि विद्यार्थीगण की सहभागिता द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ किया।
न्यायाधिपति संजीव प्रकाश शर्मा ने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39ए सभी को न्याय के समान अवसर उपलब्ध कराने का निर्देशात्मक सिद्धांत प्रदान करता है। उक्त निर्देशात्मक व्यवस्था के तहत गठित अधिकरण राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से हर नागरिक के लिए न्याय प्राप्त करने का सुगम और सुलभ साधन है। राष्ट्रीय लोक अदालत पक्षकारों को सुलह के लिए सशक्त मंच प्रदान करती है और यह एक ऐसा स्थान है, जहां विवाद के पक्षकार समाधान की प्रक्रिया में स्वयं भाग लेते हैं और विवाद का समाधान भी स्वयं ही तय करते हैं।
संजीव प्रकाश शर्मा की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में विधिक सेवा संस्थाओं द्वारा प्रदेश में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 6,74,458 लम्बित प्रकरणों सहित कुल 55,21,157 प्रकरणों का लोक अदालत की भावना से राजीनामे के माध्यम से निस्तारण किया गया, जिसमें कुल 10,97,52,33,175 रुपये की राशि के अवॉर्ड पारित किये गये। राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ द्वारा 226 प्रकरणों का राजीनामे के माध्यम से निस्तारण किया गया।


