Friday, May 15, 2026
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अभियांत्रिकी महाविद्यालय और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के मध्य हुआ एमओयू

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बीकानेर Abhayindia.com अभियांत्रिकी महाविद्यालय बीकानेर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीकानेर स्थित केंद्र राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र बीकानेर के बीच साझा रिसर्च और लर्निंग प्रोग्राम के लिए एमओयू सम्पन्न हुआ। बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि कुलपति प्रो.अजय कुमार शर्मा की उपस्थिति में एमओयू पर ईसीबी – बीकानेर तकनिकी विश्वविद्यालय की तरफ से प्राचार्य डॉ. ओपी जाखड़ और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान बीकानेर की तरफ से डॉ. टीके भट्टाचार्य, निदेशक, आईसीएआर -नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स, हिसार द्वारा हस्ताक्षर कर एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।

इस अवसर पर अश्व अनुसंधान केंद्र बीकानेर के क्षेत्रीय परिसर इक्विन प्रोडक्शन कैम्पस के प्रमुख तथा जेनेटिक्स और ब्रीडिंग विभाग के प्रमुख और प्रिंसिपल वैज्ञानिक डॉ. शरत चंद्र जैन, बीटीयू डीन डॉ. यदुनाथ सिंह, ईसीबी प्राचार्य डॉ. ओपी जाखड़, डॉ. मुहम्मद कुट्टी, वैज्ञानिक, एनिमलबायोकेमिस्ट्री, विभिन्न विभागाध्यक्ष एवम फैकल्टी मेम्बर्स उपस्थित थे। इस प्रोग्राम का उद्देश्य अश्व अनुसंधान में इलेक्ट्रोनिक्स आधारित इंस्त्रूमेंटेशन, ऑटोमेशन और आईटी सिस्टम्स का समावेश करना है।

कुलपति प्रो. अजय कुमार शर्मा ने कहा कि इलेक्ट्रोनिक्स तथा एआई आधारित इंस्ट्रूमेंटेशन अश्व की उत्पादकता, स्वास्थ्य बेहतर बनाते हुए इसके नस्लीय विकास को गति प्रदान करेगा। मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च को बढावा देने वाले इस एमओयू से दोनों संस्थानों के बीच सहयोग और ज्ञान साझा करने अश्व अनुसंधान में नवाचार और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने का मार्ग प्रशस्त होगा।

डॉ. यदुनाथ सिंह डीन अकादमिक ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीकानेर स्थित अश्व अनुसंधान केंद्र के साथ इसीबी का शोध एवम अकादमिक क्षेत्रो में साझा प्रयास इंटेलिजेंट इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम्स आधारित आधुनिक टेक्नोलोजी का विकास सम्भव हो सकेगा। छात्रो को अपनी स्किल्स उद्योगो के अनुरूप सटीक एवम बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।

ईसीबी प्राचार्य डॉ. ओपी जाखड़ ने एमओयू की विस्तृत रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस एमओयू के तहत अश्व की बेहतर निगरानी खानपान एवं स्वास्थ्य जांच के लिए ऑटोमेशन सिस्टम विकसित किए जाएंगे। इस परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी ईसीबी के सहायक प्रोफेसर अरविंद और हरजीत सिंह एवं केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ कुट्टी के नेतृत्व में विभिन्न वैज्ञानिकों की टीम देखेगी।

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