Monday, June 22, 2026
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अक्षय तृतीया पर रहेगी विवाह आयोजनों की धूम, बाजारों में रौनक चढ़ेगी परवान

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कल्‍चर डेस्‍क अक्षय तृतीया (आखातीज) का अबूझ मुहूर्त इस बार 22 अप्रेल को है। इस दिन मांगलिक कार्यों की धूम रहेगी। इसी दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाएगी। लंबे समय बाद मांगलिक कार्य प्रारंभ होने से बाजार में भी रौनक परवान पर रहेगी। इस दिन बड़ी संख्‍या में विवाह आयोजन होंगे। लिहाजा बाजार में खानेपीने की वस्‍तुओं के अलावा कपड़ों और आभूषणों की भी जमकर खरीदारी होगी।

आपको बता दें कि शास्त्रों के अनुसार, अक्षय तृतीया का दिन मां लक्ष्मी की पूजा को समर्पित है। इस दिन शुभ मुहूर्त में किए काम से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती हैं। इस दिन लक्ष्मी की आराधना करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। 22 अप्रेल को सुबह 7.49 बजे से तृतीया तिथि की शुरुआत होगी और 23 अप्रेल सुबह 07 बजकर 47 मिनट तक मान्य रहेगा।

क्‍यों कहते हैं आखातीज : अक्षय तृतीया को आखातीज भी कहा जाता है। आखा का अर्थ संपूर्ण, छानना छलनी, खुरजी, एक विशेष प्रकार का बर्तन से है। लेकिन यहां इसका अर्थ कभी न नष्ट होने वाले से है। यानी अविनाशी मुहूर्त या अबूझ मुहूर्त। इस तिथि स्वयं सिद्ध मुहूर्त की मान्यता प्राप्त है। यानि इस दिन बिना मुहूर्त का विचार किए नए काम शुरू किए जा सकते हैं। इसीलिए अक्षय तृतीया पर अधिकतर लोग विवाह करते हैं। शास्‍त्रों के अनुसार, इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता। सनातन धर्म में साढ़े तीन मुहूर्त को अबूझ मुहूर्त की मान्यता दी गई है। इनमें नववर्ष प्रतिपदा, विजयादशमी, अक्षय तृतीया एवं कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का अर्द्धभाग शामिल है। इन तिथियों अन्य किसी मुहूर्त पर विचार किए बिना ही शुभ एवं मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, नामकरण, व्रत उद्यापन, गृहप्रवेश आदि संपन्न किए जा सकते हैं।

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