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मकान का मुख नहीं, ‘वीथि’ तय करती है आपका भविष्य प्राचीन ग्रंथों का सड़क विज्ञान

आप प्रॉपर्टी डीलर  से पूछते हैं भैया, मकान का मुंह किधर है? डीलर कहता है “पूरबमुखी है साहब, एकदम वास्तु से!” और आप खुश होकर पैसा दे देते हैं। रुकिए। आपने वास्तु का सबसे जरूरी सवाल पूछा ही नहीं। शास्त्रों में साफ लिखा है मकान का मुंह नहीं, मकान के सामने की सड़क उसका भाग्य लिखती है। वो सड़क किधर है? वो सीधी आपके दरवाजे पर आकर ठोकर मार रही है या तिरछी निकल रही है? वो आपके घर से ऊंची है या नीची? उसकी चौड़ाई कितनी है?

क्योंकि आपका घर हवा में नहीं लटका, वो जमीन पर है और उस जमीन का पहला रिश्ता सड़क से है। सड़क ही तय करेगी आपके घर में सुबह की धूप आएगी या नहीं, हवा आएगी या घुटन रहेगी, बारिश का पानी बाहर जाएगा या आपके ड्राइंग रूम में घुसेगा। प्राचीन वास्तु ग्रंथों में इसे वीथि-विचार कहा गया है, और आज की भाषा में Town Planning. नाम बदल गया, विज्ञान वही है। तो पूरब-पश्चिम के चक्कर से बाहर निकलिए, असली वास्तु अब शुरू होता है।

आपका घर अकेला नहीं है। वो अपने सामने की सड़क, उसकी चौड़ाई, उसकी ऊंचाई-निचाई, उसकी ढलान और उस पर चल रहे ट्रैफिक से हर पल बात करता है। यही बातचीत तय करती है कि घर में रोशनी कैसी आएगी, हवा कैसी रहेगी, पानी किधर बहेगा और घर में रहने का अहसास कैसा होगा। ग्रंथों में साफ लिखा है – सामने की वीथि अलग फल देती है, पीछे की अलग, और चारों तरफ की वीथि का फल अलग होता है। तो सड़क का विचार कोई आधुनिक वास्तु वालों ने नहीं बनाया, ये हजारों साल पुरानी परंपरा है।

तो आइए, भ्रम से बाहर निकलकर सच्चा वास्तु समझते हैं-

1. सड़क को समझने के 3 लेवल सिर्फ “पूरब की सड़क है” कहना अधूरा है। पहला मकान का मुंह किधर है? दूसरा सड़क मकान के किस तरफ है? तीसरा और सबसे जरूरी सड़क मकान की तरफ आ कैसे रही है? सीधी आ रही है, तिरछी आ रही है, क्या वो आपके दरवाजे पर आकर खत्म हो रही है? सड़क ऊंची है या आपका मकान ऊंचा है?

2. दिशा के हिसाब से सड़क का सच पूरब की सड़क सुबह की धूप, उजाला और खुलापन इसका सबसे बड़ा लाभ है। पर अगर सामने 4 मंजिला इमारत खड़ी है, सड़क 10 फीट की तंग गली है और आपका मकान सड़क से 3 फीट नीचे है, तो सिर्फ “पूरब की सड़क” होने से कोई फायदा नहीं। उत्तर की सड़क इसे धन और अवसर की दिशा कहा गया है। बिजनेस के लिए ये सड़क सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि ग्राहक की नजर और आवाजाही सीधी रहती है। पर यहां भी वही नियम – सामने कचरा, ऊंची सड़क या गलत प्रवेश सारे लाभ खत्म कर देता है।

दक्षिण की सड़क सबसे बड़ा झूठ

दक्षिण की सड़क वाला मकान मत लो ये वास्तु के नाम पर सबसे बड़ा डर है। सच ये है कि दक्षिण दिशा अपने आप में अशुभ नहीं है। दुनिया के कई बड़े और सफल लोगों के घर-दुकान दक्षिणमुखी हैं। देखना ये चाहिए आपका दक्षिण-पश्चिम कोना भारी है या नहीं, उत्तर-पूरब खुला है या नहीं, और मुख्य प्रवेश कहां है। सिर्फ सड़क को देखकर घर को अशुभ कहना वास्तु का अपमान है। पश्चिम की सड़क गर्म इलाकों जैसे राजस्थान में पश्चिम की धूप घर को गर्म करती है। इसलिए यहां डिजाइन, वेंटिलेशन और छायादारी का खेल ज्यादा जरूरी हो जाता है।

3. सबसे खतरनाक माना जाने वाला वीथि-शूल (सड़क का वेध)

जब कोई सड़क सीधे आपके प्लॉट या दरवाजे की तरफ निशाना लगाती हुई आती है, उसे वीथि-शूल कहते हैं।क्या हर वेध अशुभ है? बिल्कुल नहीं। किस दिशा से सड़क आ रही है, वो आपके प्लॉट के किस कोने को छू रही है, सड़क और घर में कितनी दूरी है इन सब पर फल निर्भर करता है। बिना देखे डरना गलत है। पहले विश्लेषण, फिर निष्कर्ष।

4. जो आज सबसे ज्यादा जरूरी है सड़क और घर का लेवल
आज शहरों में हर 2 साल में सड़क पर नई परत चढ़ जाती है। जो मकान कभी सड़क से 2 फीट ऊपर था, आज सड़क से 1 फीट नीचे चला गया है। इससे क्या होता है? बारिश का सारा पानी घर में, दीवारों में सीलन, और नींव कमजोर।

इसलिए प्लॉट लेते समय 4 सवाल जरूर पूछें:

1. पानी किस दिशा में बह रहा है?
2. सड़क का लेवल क्या है और मकान का Plinth Level क्या है?
3. बरसात में पानी कहां जमा होता है?
4. नाली की निकासी किधर है?

वास्तु को दो तरह के लोग मार रहे हैं। एक वो, जो इसे धंधा बनाकर डराते हैं ये कर दिया तो विनाश हो जाएगा, ये पूजा कर लो तो करोड़पति बन जाओगे। और दूसरे वो, जो बिना एक ग्रंथ पढ़े इसे बकवास बोलकर अपनी आधुनिकता दिखाते हैं। दोनों अधूरे हैं। दोनों ने वास्तु पढ़ा ही नहीं। सच सुनिए वास्तु अंधविश्वास नहीं, Human Comfort का शुद्ध विज्ञान है। हमारे ऋषि जिसे प्रकाश कहते थे, आज इंजीनियर उसे Sunlight कहता है।जिसे वो वायु कहते थे, वही आज Ventilation है। जिसे वो जल-निकास कहते थे, वही आज Drainage है। जिसे वो भूमि का ताप कहते थे, वही आज Thermal Comfort है।शब्द बदल गए, विज्ञान वही है।

इसलिए अगली बार कोई आपको डराए कि ये दक्षिण की सड़क है, मत लो! तो डरिए मत, उससे पलटकर 4 सवाल पूछिए सड़क कितनी चौड़ी है? लेवल क्या है? वेध कहां लग रहा है? और आपका नक्शा क्या कहता है? जवाब मिल गया तो वास्तु है, जवाब नहीं तो सिर्फ डर का व्यापार है। याद रखिए घर ईंट-पत्थर का ढेर नहीं है। घर सड़क, हवा, पानी और आपके बीच का एक जीवित संवाद है। संवाद सुधरा तो जीवन सुधरा। -सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431

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