Sunday, February 8, 2026
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वास्तुसम्मत हो तो मुख्य द्वार बन सकता है भाग्य का द्वार… (पार्ट-2)

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वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को केवल प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि भाग्य का द्वार माना जाता है। यदि यह सही दिशा, स्थिति और स्वच्छता के अनुसार हो, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आते हैं। वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार (Main Entrance) को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यही वह स्थान है जहाँ से सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) घर में प्रवेश करती है।

1. भल्लाट : भल्लाट नामक द्वार को विपुल लक्ष्मी का द्वार माना जाता है। अतः इस द्वार का संबंध धन से जोड़ा गया है। इस द्वार से अचल संपत्ति भी प्राप्त होती है।

2. सोम : उत्तर दिशा के सोम पद पर द्वार को सर्वश्रेष्ठ द्वार कहा गया है। इस द्वार से गुणों एवं संपत्ति की वृद्धि होती है। सोम के निघण्टु कुबेर है जिन्हें धनाध्यक्ष कहा जाता है। यह द्वार पीढ़ी दर पीढ़ी सुख एवं समृद्धि लाने वाला है।

3. भुजंग : भुजंग नामक यह द्वार पुत्र से मतभेद करवाता है। इस द्वार के प्रभाव के कारण पिता, पुत्र की नीतियों एवं कार्यशैली से सहमत नहीं होता है, भले ही व्यावहारिक रूप से पुत्र गलत न हो। पिता सार्वजनिक रूप से पुत्र का अपमान व आलोचना करता है जिसके कारण इनमें वैचारिक दूरी बढ़ती जाती है और पुत्र पिता से दूर होता चला जाता है।

4. अदिति : अदिति नामक यह द्वार स्त्री दोष को जन्म देता है। संयुक्त परिवारों में स्त्रियां आपस में लड़ेंगी और घर परिवार का विभाजन करव् देंगी। इस द्वार के कारण महिला में चारित्रिक दोष भी आते हैं।

5. दिति : ईशान कोण की ओर का यह द्वार निर्धनता लाने वाला द्वार है। इस द्वार के कारण समृद्धि खत्म होने लगती है, व्यवसाय में बार-बार घाटा होता है और अंततः व्यक्ति निर्धनता के चक्रव्यूह में उलझ जाता परिवार में विभाजन देखने को मिलता है।

6. असुर : असुर नामक यह द्वार राजभय लाता है। असुर के निघण्टु राहू देव हैं। इस द्वार के प्रभाव के कारण इन्कम टैक्स, सैल्सटैक्स आदि सरकारी एजेन्सियों के छापे पडने की तीव्र संभावना रहती है। सरकार द्वारा भूमि के अधिग्रहण आदि भी इसी द्वार के परिणामस्वरूप आते हैं। असुर राहु का स्थान है। राहु जहाँ होंगे वहाँ सूर्य का अभाव मिलेगा। सूर्य सरकार है अतः सूर्य के अभाव का तात्पर्य है सरकारी कृपा का अभाव जिसके कारण टैक्स एजेन्सियां आदि विरोध में सक्रिय हो जाती हैं।

7. शोष : इस द्वार का परिणाम धन क्षय है। शोष के निघण्टु सूर्य पुत्र शनि हैं। इस द्वार के प्रभाव से धन हानि अचानक होती है। व्यावसायिक संस्थानों आदि में यह द्वार भारी नुकसान ला सकता है जिससे उबरना लगभग असम्भव होता है। दिवालियेपन को स्थिति इस द्वार के कारण आ सकती है।

8. रोग : इस द्वार के कारण या तो घर में बीमारी लगातार बनी रहती है या कोई असाध्य रोग जन्म ले लेता है। यदि व्यावसायिक संस्थानों या फैक्ट्रियों आदि में यह द्वार हो तो रोग की परिभाषा भिन्न होगी। उत्पादन में कमी, गलत निर्णय आदि एक फैक्ट्री के रोग होते हैं जो कि धीरे-धीरे उसको ‘Sick Industry’ में बदल देता है। दुर्घटना से मृत्यु भी इस द्वार के परिणाम है।

9. पापयक्ष्मा : यह द्वार अत्यंत भयानक परिणाम देता है जैसे मृत्यु एवं बंधन आदि । कर अपवचन के मामलों में सजा आदि देखने को मिल सकते हैं। वायव्य कोण का द्वार रिश्तों में असंतोष को जन्म देता है जिसके कारण हिस्टीरिया जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

10. नाग : इस द्वार का परिणाम है शत्रु वृद्धि । यह द्वार रोगों को निमंत्रण देने वाला है। नाग का संबंध जहर एवं षड्यंत्रों से जोडा जा सकता है। । इस द्वार से इस प्रकार के ही परिणाम आते हैं जैसे जहर खाकर आत्महत्या या सबसे विश्वसनीय व्यक्ति के द्वारा विश्वासघात आदि।

11. पितृगण : दक्षिण पश्चिम दिशा अर्थात् नैऋत्य कोण के द्वार का नाम पितु है। इस द्वार का परिणाम पुत्र का नाश बताया गया है। इस कोण का स्वामित्व राहु देव को प्राप्त है। यह द्वार राज भय भी लाता है। यह द्वार राजपक्ष से भय और विवादों के साथ समस्याएँ भी देता है। व्यापार में घाटा भी होता है।

12. दौवारिक : यह द्वार शत्रु वृद्धि देता है। इस द्वार के परिणामों में व्यक्ति द्वारा जाने अनजाने में किसी का अपमान कर दिया जाकर शत्रु वृद्धि कर लेना है और अपमानित व्यक्ति द्वारा किए गए षड्यंत्रों का भागी बन जाना और उससे कार्य में हानि होना आदि शामिल हैं। जब कोई व्यक्ति प्रतिशोध की ज्वाला में जल रहा होता है तो वह परिणाम की नहीं सोचता अतः अपमान करने वाला तथा अपमानित व्यक्ति दोनों ही इसका शिकार होते हैं और विनाश को स्वयं बुलावा दे लेते हैं।

13. पुष्पदंत : पश्चिम दिशा की ओर का यह द्वार पुष्पदंत पुत्र, धन व बल की प्राप्ति करवाता है। यह द्वार कार्यक्षमता में वृद्धि लाता है तथा व्यक्ति पूर्णोत्साह व लगन के साथ अपने कार्यों को संपादित करता है। धन प्राप्ति और आय के नवीन स्रोत खुलते हैं। संतानहीनता के मामलों में यह द्वार खुलवाने से आशाजनक परिणाम मिलते हैं।

14. वरुण : वरुण पश्चिम दिशा मध्य का द्वार है जो शुभ परिणाम देता है। इस द्वार से धन संपत्ति की प्राप्ति होती हैं। चन्द्रमा एवं वरुण का गहरा संबंध है। वरुण चन्द्रमा के समान ही जलाधिक्य एवं रसाधिक्य देते हैं। यह द्वार सांसारिक मोहमाया अधिक देता है। -सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल- 6376188431

सही दिशा में बना मुख्य द्वार कर सकता है मालामाल, जानें- क्‍या कहता है वास्तु शास्त्र…

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