नियम विरूद्व किये गये स्थानांतरण पर उच्च न्यायालय की रोक, बीकानेर से जुड़ा है मामला…

जोधपुर/बीकानेर Abhayindia.com राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ के न्यायाधीश अरूण भंसाली ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव के द्वारा पारित आदेश 28.07.2022 जिसके तहत सामाजिक सुरक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत नन्दकिशोर राजपुरोहित का स्थानान्तरण, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी पंचायत समिति नोखा (बीकानेर) से अधीक्षक, राजकीय सम्प्रेक्षण एवं किशोर गृह बाल अधिकारिता विभाग, झालावाड़ किये गये स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है।

मामले के अनुसार, बीकानेर निवासी नन्द किशोर राजपुरोहित की नियुक्ति सामजिक सुरक्षा अधिकारी के पद पर पंचायत समिति नोखा के वर्ष 2018 में हुई थी। दिनांक 8.7.2022 के आदेश से उसका स्थानान्तरण निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव के आदेश से अधीक्षक राजकीय सम्प्रेक्षण एंव किशोर ग्रह बाल अधिकारिता विभाग झालावाड किया गया।

विभाग के इस आदेश से व्यथित होकर प्रार्थी ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से रिट याचिका प्रस्तुत की। प्रार्थी के अधिवक्ता का न्यायायल के समक्ष पहला तर्क यह था कि प्रथमतया प्रार्थी की नियुक्ति सामाजिक सुरक्षा अधिकारी के पद पर हुई है व वर्तमान में वह इसी पद पर कार्यरत है, इसके उपंरात भी विभाग द्वारा उसे अधीक्षक के पद पर स्थानान्तरण किया गया है जो अनुचित है। दुसरा तर्क यह था कि राज्य के परिपत्र 02.10.2010 से सामजिक न्याय अधिकारिता विभाग से कर्मचारियों को पंचायती राज विभाग के अधीन कर दिया गया है। पंचायतीराज विभाग द्वारा स्थानांतरित होकर आये कर्मचारियों के स्थानांतरण के संदर्भ में ’’राजस्थान स्थानांन्तरित कर्मचारी स्थानांतरण नियम 2011’’ बनाये गये है। जिसके नियम 8 (3) में स्‍पष्‍ट प्रावधान है कि एक जिले से दूसरे जिले में स्थानान्तरण है। पैतृक विभाग यानि सामजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ही करेगा परन्तु ऐसा स्थानांतरण करने से पूर्व दोनों जिलों की जिला परिषद से अनुशंषा प्राप्त करने के उपंरात ही स्थानांतरण कर सकेगा। प्रार्थी के अधिवक्ता का न्यायालय के समक्ष यह तर्क था कि वर्तमान प्रकरण मे प्रार्थी का बीकानेर जिले से झालावाड जिले में स्थानांतरण करने से पूर्व किसी प्रकार की अनुशंषा बीकानेर जिला परिषद एवं झालावाड जिला परिषद से नही ली गई। यह तथ्य स्थानांतरण आदेश को देखने से प्रथमतया परिलक्षित होती है।

प्रार्थी के अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के तर्को से सहमत होते हुए उच्च न्यायालय ने प्रार्थी की रिट याचिका को अंतरिम रूप से ग्राहय करते हुए प्रार्थी के स्थांनातरण आदेश 28.7.2022 पर अंतरिम रूप से रोक लगाई। साथ ही सचिव, सामजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, निदेशक एवं संयुक्त सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद बीकानेर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।