





बीकानेर abhayindia.com शहर में होली का विधिवत आगाज शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज के विधवत रूप से मां नागणेचीजी को गुलाल अर्पित करने के बाद ही होता है। रियासतकाल से चली आ रही इस परंपरा का निर्वाह आज भी उत्साह और मनोयोग के साथ किया जा रहा है। फाल्गुन सुदी सप्तमी (खेलनी सप्तमी) पर 2 मार्च को समाज के लोग नागणेचीजी मंदिर में देवी माता की पूजा-अर्चना कर उनसे खुशहाली, सुख-शांति से त्योहार मनाए जाने का आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद से ही एक तरह से शहर में होली का आगाज हो जाएगा।
आपको बता दें कि शाकद्वीपीय समाज के लोग खेलनी सप्तमी के दिन देवी माता को विशेष भोग लगाते हैं। परिवार के सभी लोग इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं। होली से पूर्व शाकद्वीपीय समाज की खेलनी सप्तमी महोत्सव के प्रति सभी वर्गों में उत्सुकता रहती है। शहर में इस महोत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसमें समाज के बड़े-बुजुर्गों के साथ ही युवा भी जोश-उत्साह के साथ भाग लेते हैं।
शहर में होली की मस्ती खेलनी सप्तमी से लेकर धुलंडी तक छाई रहेगी। शाकद्वीपीय समाज के लोग खेलनी सप्तमी के दिन अपराह्न बाद नागणेचेजी मंदिर में एकत्र होकर देवी माता का विशेष शृंगार करेंगे। पूजन-आरती के बाद भजनों की प्रस्तुतियां देंगे। साथ ही मंदिर में गुलाल उड़ाकर होली के आगाज की परम्परा का निर्वाह करेंगे बाद में समाज के सभी लोग गोगागेट से गेर के रूप में शहर में प्रवेश करेंगे। यहां से चंग की थाप पर होली (गेवर) के पारम्परिक गीत गाते हुए सुपारी बाजार, मरुनायक चौक, बड़ा बाजार, सब्जी बाजार, नाइयों का मोहल्ला, मोहता चौक होते हुए मूंधड़ा सेवगों के चौक में पहुंचेंगे।
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