Hometrendingबीकानेर नगर निगम चुनाव 2026 : मतदान से पहली रात को क्‍यों...

बीकानेर नगर निगम चुनाव 2026 : मतदान से पहली रात को क्‍यों कहते हैं “कत्‍ल की रात”, जानिए इसके पीछे का पूरा सियासी गणित…

AdAdAdAdAdAd

बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर नगर निगम चुनाव-2026 के लिए 9 सितंबर को मतदान होना है। प्रचार थम चुका है, लेकिन बीकानेर के हर वार्ड में आज रात सन्नाटा नहीं, बल्कि सबसे ज्यादा हलचल रहने वाली है। राजनीतिक गलियारों में आज की रात यानी मतदान से पहले की रात को ‘कत्ल की रात’ कहा जा रहा है। सवाल है कि आखिर इसे कत्ल की रात क्यों कहा जाता है? वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि यह शब्द खून-खराबे के लिए नहीं, बल्कि चुनाव को कत्ल करने की रणनीति के लिए इस्तेमाल होता है।

जब दिन का वोट रात में कत्ल हो जाता है

पूरे 5 दिन प्रचार में जो हवा बनाई जाती है, वो कई बार एक रात में खत्म हो जाती है। दिन में जो मतदाता कांग्रेस, भाजपा या किसी स्‍वतंत्र प्रत्‍याशी का पक्का समर्थक दिखता है, रात में शराब, नकदी, साड़ी-कंबल और अन्य प्रलोभनों से उसका मन बदल दिया जाता है। इसलिए इसे वोट के कत्ल की रात कहते हैं।

सबसे ज्यादा 'लेन-देन' की रात

प्रशासन कितना भी सख्त हो, इस रात गली-मोहल्लों में लिफाफे पहुंच ही जाते हैं। यह खेल बेहद गुपचुप तरीके से होता है। प्रत्याशी के खास 4-5 लोग ही इस मिशन पर होते हैं, जिन्हें ‘नाइट वारियर्स’ कहा जाता है। हालांकि, यह काम प्रचार के सभी दिनों चलता है, लेकिन आखिरी रात का यह काम परवान चढ़ता है। कई जगहों पर तो बाकायदा ऐसे ‘नाइट वारियर्स’ का इंतजार रहता है।

रूठों को मनाने और बिठाने की रात

बीकानेर में 40 से ज्यादा बागी मैदान में हैं। आज की रात ही वो आखिरी मौका है जब बड़े नेता बागियों के घर जाकर उन्हें बैठाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए साम, दाम, दंड, भेद सारे अपनाए जाएंगे। कई बार आधी रात को बागी के बैठने से पूरे वार्ड के चुनावी गणित का ही “कत्ल” हो जाता है।

अफवाहों से माहौल कत्ल करने की रात

यह रात अफवाहों की सबसे बड़ी रात होती है। “फलां प्रत्याशी को पुलिस ने पकड़ लिया”, “दूसरे वार्ड के पार्षद ने समर्थन दे दिया”, “पैसा बंट गया” जैसी अफवाहें फैलाकर मतदाता के मन में डर और भ्रम पैदा किया जाता है। आजकल सोशल मीडिया इसका सबसे बड़ा “पाटा” बनकर उभरा है। इसके जरिये चुनावी अफवाहें तेजी से फैलाई जाती है।

जो सोया, वो खोया

राजनीति का एक अलिखित नियम है कि कत्ल की रात को जो प्रत्याशी और उसका बूथ एजेंट सो गया, समझो वो चुनाव हार गया। इस रात हर बूथ पर पहरा लगता है, मतदाता की निगरानी होती है, ताकि विरोधी उसे तोड़ न ले जाए। कुल मिलाकर आज की रात ही तय करेगी कि बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कल किसके पक्ष में बटन दबेगा। दिन में चुनाव प्रचार सिर्फ चेहरा था, असली चेहरा तो आज रात ही दिखेगा। -सुरेश बोड़ा, संपादक, अभय इंडिया, 9829217604

AdAdAdAdAd
- Advertisment -

Most Popular