जयपुर Abhayindia.com मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में बुधवार को राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी दिशा-निर्देशों की पालना, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध तथा आगामी दीपावली के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में ग्रीन पटाखों के उपयोग और विभिन्न विभागों द्वारा की जा रही कार्यवाही की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने बैठक में आगामी दीपावली के मद्देनजर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अनुपालना में जारी निर्देशों के अनुसार राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र में शामिल अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा एवं कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में केवल सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति होगी।
निर्धारित आदेश के अनुसार ग्रीन पटाखे केवल 7 एवं 8 नवंबर को प्रातः 6 से 7 बजे तथा रात्रि 8 से 10 बजे तक ही चलाए जा सकेंगे। इन दो दिनों की निर्धारित समयावधि के अतिरिक्त पटाखे चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा शैक्षणिक संस्थानों को शांत क्षेत्र एवं नो-क्रैकर जोन घोषित किया गया है। इन संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।
बैठक में बताया गया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी आदेश के क्रम में एनसीआर क्षेत्र में 5 से 20 नवंबर तक धूल उत्पन्न करने वाली विध्वंस एवं खुले में की जाने वाली निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र में शामिल जिलों में भी प्रभावी होगा। हालांकि रेलवे, मेट्रो सेवाओं, एयरपोर्ट, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, अस्पताल, जलापूर्ति एवं स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को निर्धारित छूट प्रदान की गई है। यह प्रतिबंध हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन, पाइपलाइन एवं दूरसंचार जैसी रैखिक सार्वजनिक परियोजनाओं पर भी लागू होगा।
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सीएंडडी वेस्ट) के प्रभावी प्रबंधन के लिए डैशबोर्ड के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रोड डस्ट के प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक प्रक्रियाओं में तेजी लाने को कहा। साथ ही, मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा इनका संचालन दो शिफ्टों में करने के निर्देश दिए, ताकि सड़कों की नियमित सफाई के माध्यम से धूल प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने एनसीआर क्षेत्र में यातायात प्रबंधन से संबंधित कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने तथा आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) प्रणाली स्थापित करने के संबंध में भी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में बताया गया कि परिवहन विभाग द्वारा एनसीआर क्षेत्र में ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (पीयूसीसी) नहीं रखने वाले 5 हजार से अधिक वाहनों पर कार्यवाही की गई है।
बैठक में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवासन विभाग आलोक गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (यातायात) मालिनी अग्रवाल, प्रमुख शासन सचिव परिवहन विभाग भवानी सिंह देथा, प्रमुख शासन सचिव कृषि मंजू राजपाल, शासन सचिव पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग शैलजा देवल, सदस्य सचिवराजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल कपिल चंद्रवाल, निदेशक स्वायत्त शासन विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



















