





बीकानेर Abhayindia.com नगर निगम चुनाव 2026 का शोर थम गया है, कल 9 सितंबर को मतदान होना है। लेकिन, इस बार का चुनाव प्रचार बीकानेर की सियासत में कई खट्टे-मीठे नहीं, बल्कि कड़वे अनुभव छोड़ गया है। टिकट से लेकर सिंबल तक, ऑडियो से लेकर वीडियो तक, बीकानेर ने इस बार जो ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ देखी, वैसी पहले कभी नहीं देखी। अब सवाल है कि इसका असर आम मतदाता के मन पर क्या पड़ेगा?
इस बार की 5 बड़ी 'डर्टी पॉलिटिक्स' वाली घटनाएं जिसने किया शर्मसार
1. जिलाध्यक्ष के साथ मारपीट, थाने तक पहुंचा मामला
इतिहास में पहली बार हुआ जब अपनी ही पार्टी के टिकट के दावेदार ने जिलाध्यक्ष पर हाथ उठा दिया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ टिकट दावेदार मोहित अरोड़ा और उसके साथियों ने सिंबल चोरी का आरोप लगाते हुए मारपीट कर दी। वीडियो वायरल हुआ, दोनों पक्ष थाने पहुंचे, परस्पर एफआईआर हुई और धरना-प्रदर्शन भी हुआ। मामला अभी जांच में है।
2. सिंबल का झांसा, भामाशाह का टिकट कटा
भाजपा में भामाशाह और सक्रिय नेता महावीर रांका को नेताओं ने सिंबल का इशारा देकर नामांकन भरवा लिया, लेकिन ऐन वक्त पर वार्ड 75 से सिंबल किसी और कार्यकर्ता को दे दिया। इससे भाजपा की अंदरूनी कलह सड़कों पर आ गई, वहीं रांका ने जनता की सहानुभूति बटोर ली। इस मामले में टिकट कटवाने वाले चौड़े आ भी गए और चौड़े हो भी गए। कहते है राजनीतिक मैदान में इस तरह की शह और मात चलती रहती है। देखते है यह मामला आगे जाकर क्या गुल खिलाता है?
3. गाली-गलौच वाला वायरल ऑडियो
शहर कांग्रेस के दो बड़े नेताओं यशपाल गहलोत और दीपक अरोड़ा (अब निष्कासित) का कथित ऑडियो जमकर वायरल हुआ, जिसमें सिंबल चोरी को लेकर गाली-गलौच हुई और कई सनसनीखेज दावे-प्रतिदावे किए गए। इससे कांग्रेस की किरकिरी हुई।
4. पूर्व मंत्री का विवादित वीडियो, फिर AI का बहाना
पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला का शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल को लेकर एक कथित विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विवाद बढ़ने पर पूर्व मंत्री ने इसे AI निर्मित बताकर पल्ला झाड़ लिया, लेकिन तब तक सियासी नुकसान हो चुका था।
5. कार्यकर्ता रोए, भाई-भतीजे टिकट ले उड़े
यह तो सिर्फ उदाहरण हैं। असली डर्टी पॉलिटिक्स तो टिकट बंटवारे में हुई। दोनों ही प्रमुख दलों ने जमीनी और सालों से पसीना बहाने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं की घोर अनदेखी की। उनकी जगह प्रभावशाली नेताओं के चहेते, रिश्तेदार और भाई-भतीजे टिकट ले उड़े। नतीजा यह हुआ कि चुनावी मैदान में बागियों की बाढ़ आ गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि कैसे प्रभावशाली नेता सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अब देखना यह है कि बीकानेर की जागरूक जनता इस डर्टी पॉलिटिक्स का जवाब कल EVM पर कैसे देती है। -सुरेश बोड़ा, संपादक, अभय इंडिया







