






बीकानेर Abhayindia.com ब.ज.सि. रामपुरिया जैन विधि महाविद्यालय की रासेयो की दोनों इकाईयों द्वारा आज स्वामी विवेकानन्द जयन्ती के उपलक्ष्य में ‘विवेकानन्द के आदर्श एवं युवा’ विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. अनन्त जोशी थे। डाॅ जोशी ने स्वयंसेवकों को स्वामी विवेकानन्द के द्वारा शिकागो में दिए गए धार्मिक उद्बोधन के मुख्य अंशों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि धर्म से तात्पर्य धारण करना हैं। युवा को अपनी ऊर्जा को संचित कर उसे देश के विकास में लगाना चाहिए एवं अपने आचरण में सद्विवेक का इस्तेमाल कर सम्पूर्ण जगत में अपनी पहचान बनानी चाहिए।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डाॅ. जोशी ने वेदान्त एवं सनातन धर्म को परिभाषित करते हुए कहा कि परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है तथा प्रत्येक व्यक्ति को केवल मैं तक ही सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि ‘तुम’ के बारे में भी सोचना चाहिए। इसी से रासेयो का नारा बना मैं नहीं तुम’। एक विधि विद्यार्थी होने के नाते हमें विधिक सहायता के रूप में भी परोपकार करना चाहिए।
इस अवसर पर महाविद्यालय के रासेयो प्रभारी डाॅ. रीतेश व्यास ने भी विवेकानन्द के आदर्शों से स्वयंसेवकों को अवगत कराया। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के वक्तव्य ‘‘उठो जागो और तब तक चलते रहो जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो’’ से अपने सम्बोधन को शुरू किया। उन्होंने बताया कि विवेकानन्द ने हिन्दू धर्म एवं संस्कृति को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी। उन्होंने ‘विश्व बन्धुत्व’ ‘परोपकार’ जैसे विचारों को भारतीय संस्कृति के परिदृश्य में परिलक्षित किया।
कार्यक्रम के अन्त में अतिथियों को रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. बालमुकुन्द व्यास द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के विचार को अपने जीवन में आदर्श के रूप में अंगीकृत कर ही हम पहले स्वयं को फिर सम्पूर्ण विश्व को परिवर्तित कर सकते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे अपने भीतर की शक्ति को पहचान कर आगे बढ़े व अपने लक्ष्य की प्राप्ति करें।


