Wednesday, May 27, 2026
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बीकानेर : नवपद ओली पर्व के धार्मिक-आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न

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बीकानेर abhayindia.com जैन श्वेताम्बर तपागच्छ की वरिष्ठ साध्वीश्री सौम्य प्रभा के सान्निध्य में कोचरों के चौक के महिला उपासरे में आयोजित नौ दिवसीय नवपद ओली पर्व की साधना, आराधना व भक्ति तथा विशेष तपस्याओं का अनुष्ठान मंगलवार को संपन्न हुआ। पर्व के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने आयम्बिल सहित विभिन्न तपस्याएं की।

साध्वीश्री सौम्य प्रभा ने प्रवचन में कहा कि ज्ञानावरणीय आदि आठों प्रकार के कर्मों को तपा दे उसी का नाम तप है, जैसे सोना खदान में से निकलता है मिट्टी से सना हुवा होता है किंतु जैसे-जैसे उसको गर्म कर तपाया जाता है वैसे-वैसे उसके ऊपर की मिट्टी दूर होने लगती है। उसी तरह तप द्वारा आत्म स्वर्ण  तपता है और उस पर लगी हुई कर्म की मिट्टी दूर हो जाती हैं फिर आत्मा की चमक बाहर आने लगती है, विषय कषाय का कचरा तप की आग में जलकर राख हो जाता है। इतना ही नहीं करोड़ों भावों के पाप कर्म भी निर्जरा हो जाती हैं। उत्तराध्ययन सूत्र में यह बात बताई गई है ’’भवकोड़ी संचियं कम्म तवसा निज्जरिजई’’ यानि तपस्या से पाप मिट जाते है।

उन्होंने कहा कि तप द्वारा सत्त्व ज्ञान प्राप्त होता है, सत्व प्राप्ति से मन वश में होता है मन के नियंत्रित  हो जाने से सच्चा स्वरूप् आत्मा प्रकट होता है। आत्मा के सच्चे स्वरूप की प्राप्ति हो जाने पर मोक्ष  और संसार से छुटकारा मिल जाता है। तप वास्तव में हमारा कायाकल्प कर देता है, शरीर को स्वस्थ रखता है शरीर की शुद्धि के लिए जैसे स्नान किया जाता है और ना जाने क्या-क्या सुगंधित द्रव्य लगाते हैं फिर भी इस तन से दुर्गंध बहने लगती है शरीर फिर मेला गंदा हो जाता है गंदगी इससे बहती ही रहती है मगर हिंगुल प्रकरण ग्रंथ में कहा है कि तपस्या से शुद्ध किया गया शरीर फिर मैला नहीं होता।

तपोनिष्ठ श्रावक मूलचंद सुरेन्द्र बद्धानी जैन परिवार की ओर से प्रभावना की गई तथा साध्वीवृृंद व श्रावक-श्राविकाओं की ओर से की गई विभिन्न तपस्याओं की अनुमोदना की गई। मंगलवार को ही चैत्र पूर्णिमा होने के कारण साध्वीवृृंद से जैन धर्म में इसके महत्व को उजागर किया। आयोजन से जुड़े सुरेन्द्र बद्धानी जैन ने बताया कि करोना महामारी को देखते हुए नवपद की ओली की सभी कार्यक्रम समिति रूप् से किए गए। साध्वीश्री ने वर्चअल माध्यम से महामांगलिक सुनाकर करोना की इस महामारी से बचाने की प्रार्थना परमात्मा से की।

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