Friday, May 15, 2026
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बीकानेर में खजूर की 34 किस्मों पर अनुसंधान, 2022 तक दोगुनी हो जाएगी कमाई…

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बीकानेर abhayindia.com स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के भारतीय कृषि प्रबंधन संस्थान (आईएबीएम) में खजूर का उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन’ विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण गुरुवार को प्रारम्भ हुआ।

राष्ट्रीय कृषि उच्‍च शिक्षा परियोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण में कृषि तथा गृह महाविद्यालय एवं आइएबीएम के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आइएबीएम के निदेशक प्रो. एन. के. शर्मा ने कहा कि खजूरशुष्क क्षेत्र में स्वास्थ्य और आय की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें मूल्य संवर्धन की अपार संभावनाएं हैं। इसे ध्यान रखते हुए यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। विद्यार्थी पूरे मनोयोग के साथ इसमें भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षणवर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के केन्द्र सरकार के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

गृह विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. दीपाली धवन ने कहा कि खजूर से छुहाराजेमकैण्डीशर्बतअचार तथा माउथ फ्रेशनर्स आदि बनाए जा सकते हैं। आज राजस्थान के 12 जिलों में खजूर पैदा हो रहे हैं। इसके मूल्य संवर्धन की ओर ध्यान दिया जाएतो इसके बेहतर परिणाम आ सकते हैं। खजूर अनुसंधान केन्द्र के प्रो. राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय ने खजूर के महत्व को समझते हुए वर्ष 1979 में यहां केन्द्र की स्थापना की। आज इस केन्द्र पर खजूर की 34 किस्मों पर अनुसंधान हो रहा है।

विशेषज्ञ करेंगे मार्गदर्शन

प्रशिक्षण से जुड़े डॉ. नरेन्द्र पारीक ने बताया कि तीन दिनों के प्रशिक्षण के दौरान खजूर के अनुसंधान एवं मूल्य संवर्धन से जुड़े विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इस दौरान वर्तमान में खजूर उत्पादनमूल्य संवर्धन की संभावनाएंविभिन्न उत्पादों को बनाने की प्रायोगिक विधिइनके प्रबंधन तथा वित्तीय सहायता के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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