





सुरेश बोड़ा/बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। जिले में सातों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों अपने विरोधियों से ज्यादा ‘अपनों’ से ही ज्यादा खतरा महसूस कर रहे हैं। खासतौर से पार्टी प्रत्याशी। टिकट वितरण को लेकर दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में इस बार भी तगड़ा धमाल मचा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रत्याशी चयन के लेकर चली योजना राजनीतिक चालों में दफन होकर रह गई। लिहाजा पार्टी प्रत्याशियों के विरोधी कई जगह ‘अपने’ ही विरोध के झंडे बुलंद कर रहे हैं। इनमें कई तो खुलेतौर पर मैदान में आ गए हैं, तो कई भीतरघात से अपने प्रत्याशी को मजा चखाने में जुटे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि कई असंतुष्ट नेता अपने विधानसभा क्षेत्र छोड़कर दूसरे क्षेत्र में फील्डिंग कर रहे हैं। ‘अपनों’ को हराने के लिए ऐसा नेता कोई कसर नहीं छोडऩा चाह रहे हैं। इनमें अधिकतर टिकट के दावेदार ही हैं। टिकट की रेस से बाहर हुए ये नेता अब अपनी-अपनी पार्टी के प्रत्याशियों से खुन्नस निकालना चाह रहे हैं। विश्लेषकों की मानें तो इन स्थितियों का सीधे तौर पर फायदा पार्टी के बागी या निर्दलीय प्रत्याशियों को पहुंचेगा।
आपको बता दें कि अपने ही असंतुष्टों से परेशान दोनों ही पार्टियंा भाजपा और कांग्रेस के आला नेता भी चिंतित नजर आ रहे हैं। वे न केवल अपने असंतुष्टों को राजी करने में लगे हैं, बल्कि प्रभावी ढंग से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे बागियों और निर्दलीयों के भी निरंतर संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। इधर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि दोनों ही पार्टियों का नेतृत्व चुनाव में उन चेहरों पर भी पूरी नजर गड़ाए हुए हैं जो पार्टी प्रत्याशियों के साथ रहकर भी ‘कार सेवा’ के जरिये उनकी लुटिया डुबोने में लगे हैं।
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