प्रिय बेटे-बेटियों, आज मैं तुमसे डॉक्टर बनकर नहीं, एक पिता बनकर बात करना चाहता हूँ। International Stress Awareness Day पर हर जगह पोस्टर लगते हैं – “Stress से बचो”। पर मैं तुमसे कहता हूँ – Stress से भागो मत, उसे समझो। क्योंकि तनाव तुम्हारा दुश्मन नहीं है, वो तुम्हारे बढ़ने का संकेत है।
1. किशोरावस्था : तूफान और वसंत एक साथ
12 से 19 साल की उम्र, विज्ञान में इसे Adolescence कहते हैं। यह जीवन का सबसे नाज़ुक और सबसे शक्तिशाली दौर है। इस समय तुम्हारे शरीर में हार्मोन का तूफान चल रहा है। तुम्हारा दिमाग़ – जिसे हम Prefrontal Cortex कहते हैं, जो सही-गलत का फैसला करता है – वो अभी बन रहा है। और तुम्हारा Amygdala – जो भावनाओं का केंद्र है – वो पूरी ताकत से काम कर रहा है। इसलिए कभी-कभी तुमको खुद नहीं पता चलता कि तुम इतना गुस्सा, इतना दुखी, इतना डरे हुए क्यों हो।यह तुम्हारी गलती नहीं है। यह तुम्हारा Biology है।
2. भारतीय किशोर का तनाव- सबसे अलग है
विदेशों में बच्चे को पूछा जाता है – “तुम क्या बनना चाहते हो?”
भारत में पूछा जाता है – “शर्मा जी के बेटे से कितने नंबर कम आए?”
हमारे बच्चों पर तनाव की 4 परतें हैं
A. परीक्षा का तनाव : 10वीं, 12वीं, NEET, JEE – जैसे पूरी ज़िन्दगी एक पेपर में तय हो जाएगी।
B. तुलना का तनाव : “देख, पड़ोसी का बेटा…” इस एक वाक्य ने लाखों बच्चों की आत्मा को घायल किया है।
C. सोशल मीडिया का तनाव : Instagram पर सब खुश दिखते हैं। सब सुंदर, सब सफल। और तुम आईने में खुद को देखते हो और सोचते हो – “मैं ही क्यों पीछे हूँ?” बेटा, वहाँ सब फिल्टर है, असल ज़िन्दगी नहीं।
D. शरीर और मन का तनाव : आवाज़ बदलना, चेहरे पर मुंहासे, लंबाई, पहली बार किसी को पसंद करना – ये सब सामान्य है, पर कोई बात नहीं करता, इसलिए तुम अंदर ही अंदर घुटते हो।
3. विज्ञान क्या कहता है?
जब तुम तनाव में होते हो, तुम्हारा शरीर Cortisol नाम का हार्मोन छोड़ता है। थोड़ा Cortisol अच्छा है – वो तुम्हें परीक्षा में जगाता है। लेकिन, जब यही Cortisol महीनों तक ऊँचा रहता है, तो नींद उड़ जाती है, भूख मर जाती है, पेट खराब होता है, सर दर्द करता है, याददाश्त कमज़ोर हो जाती है। हम इसे Chronic Stress कहते हैं।
याद रखो – तुम्हारा शरीर झूठ नहीं बोलता। अगर नींद नहीं आ रही, पेट गड़बड़ है, रोना आ रहा है – तो वो तुम्हारे मन की पुकार है। उसे अनसुना मत करो।
4. तो करें क्या? मेरे 5 सूत्र
मैं 24 साल से बच्चों का डॉक्टर हूँ। मैंने एक ही कमरे में, एक ही आकाश के नीचे, ज़िन्दगी का सबसे बड़ा तनाव जिया है। मैंने वहाँ से 5 सूत्र सीखे हैं, जो मैं तुम्हें दे रहा हूँ:
1. बात करो- चुप मत रहो : तनाव का सबसे बड़ा इलाज है- बोलना। माँ से, पिता से, दोस्त से, शिक्षक से। जो बच्चा बोल देता है, वो बच जाता है।
2. तुलना छोड़ो, संतोष पकड़ो
संतोष है… स्वयं के भीतर से भर जाना… तुलना से मुक्ति… अभाव में भी शांति… कम में भी पूर्णता… तुम्हारी दौड़ किसी और से नहीं, कल वाले तुमसे है।
3. मोबाइल को मालिक मत बनाओ, नौकर बनाओ : रात 10 बजे के बाद फोन को सोने दो। तुम्हारा दिमाग़ भी सोना चाहता है। 1 घंटा खेल, 30 मिनट धूप, 8 घंटा नींद – यही तुम्हारी सबसे बड़ी दवा है।
4. असफलता = अंत नहीं : एक पेपर फेल होना, ज़िन्दगी फेल होना नहीं है। मैं रोज़ ऐसे बच्चों को देखता हूँ जो नंबरों में पीछे थे, पर ज़िन्दगी में सबसे आगे निकले।
5. मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, बहादुरी है : अगर मन बहुत भारी लगे, घबराहट हो, नींद न आए, तो किसी डॉक्टर, काउंसलर से मिलने में शर्म कैसी? जैसे बुखार के लिए डॉक्टर के पास जाते हो, वैसे ही मन के बुखार के लिए भी जाओ।
अंत में- माता-पिता और शिक्षकों से एक प्रार्थना
बच्चों को नंबरों की मशीन मत बनाइए। उनसे पूछिए – “बेटा, आज तुम खुश हो?” क्योंकि एक खुश बच्चा ही एक सफल डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार बन सकता है। एक डरा हुआ बच्चा सिर्फ एक डरा हुआ बड़ा इंसान बनता है।
मेरे प्यारे किशोरों, तुम्हारा तनाव तुम्हारी कहानी का अंत नहीं है। यह तो बस एक अध्याय है। और इस अध्याय को तुम बहुत खूबसूरती से पार कर जाओगे। तुम अकेले नहीं हो। हम सब तुम्हारे साथ हैं। -डॉ. श्याम अग्रवाल, बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ, बीकानेर




















