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बीकानेर में पंचायत चुनाव : 11 लाख की सम्मान राशि लौटाई, महिला सरपंच प्रत्‍याशी व प्रतिनिधि बोले- जनता का प्यार ही सबसे बड़ी पूंजी

बीकानेर Abhayindia.com पंचायत समिति बीकानेर की ग्राम पंचायत जलालसर के अंतर्गत आने वाले गांव खींचीयाँ में सरपंच चुनाव के बाद आपसी प्रेम, सम्मान और समर्पण की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। गत 30 अक्टूबर को संपन्न हुए सरपंच चुनाव में सरपंच पद की प्रत्याशी रूपा कंवर एवं सरपंच प्रतिनिधि भंवरसिंह खीची को भले ही जीत हासिल नहीं हुई और उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा, लेकिन गांववासियों के दिलों में उनके प्रति सम्मान और विश्वास में कोई कमी नहीं आई।

चुनाव परिणाम के बाद खींचीयाँ गांव के ग्रामीणों एवं समर्थकों ने एक अनूठी पहल करते हुए भंवरसिंह खीची के सम्मान स्वरूप 11 लाख रुपये की धनराशि एकत्रित की। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान अभियान में लगी सभी गाड़ियों का किराया भी नहीं लेने का सामूहिक निर्णय लिया गया। ग्रामीणों की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि उनके लिए चुनाव की जीत-हार से कहीं बढ़कर आपसी रिश्ते, सम्मान और समर्पण मायने रखते हैं।

जब ग्रामीणों द्वारा एकत्रित की गई 11 लाख रुपये की सम्मान राशि भंवरसिंह खीची को देने की बात सामने आई तो उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे पैसों की कोई आवश्यकता नहीं है। चुनाव में गांव और पंचायत के लोगों ने जो प्यार, मान-सम्मान और अपने अमूल्य मत देकर जो विश्वास जताया है, उसका कोई मोल नहीं हो सकता। मेरे लिए यही सबसे बड़ी पूंजी और सबसे बड़ा सम्मान है। मुझे भविष्य में भी आप सभी का ऐसा ही साथ, स्नेह और आशीर्वाद चाहिए।

हालांकि, ग्रामीणों एवं समर्थकों के लगातार आग्रह और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए भंवरसिंह खीची ने चुनाव अभियान में लगी गाड़ियों का किराया नहीं लेने के निर्णय को स्वीकार कर लिया। उन्होंने इसे अपने समर्थकों के प्रेम और सामूहिक भावना का सम्मान बताया। आज के दौर में जहां चुनावी जीत-हार के बाद अक्सर राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं, वहीं खींचीयाँ गांव की इस पहल ने एक अलग ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। एक ओर ग्रामीणों का अपने प्रतिनिधि के प्रति यह समर्पण चर्चा का विषय बना हुआ है, तो दूसरी ओर भंवरसिंह खीची द्वारा 11 लाख रुपये की सम्मान राशि लेने से इनकार करना उनके समर्थकों के प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।

यह घटना केवल 11 लाख रुपये की धनराशि या चुनावी गाड़ियों के किराये तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास, अपनत्व और एकजुटता की कहानी है, जहां हार के बाद भी सम्मान कम नहीं हुआ। खींचीयाँ गांव की यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए आपसी भाईचारे और जनप्रतिनिधि एवं जनता के बीच मजबूत रिश्तों की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी है और पुरे जिले में ही नहीं पुरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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