बीकानेर Abhayindia.com हास्य को सहज संवेदना, व्यंग्य को सामाजिक चेतना और शब्दों को मानवीय सरोकारों की अभिव्यक्ति बना देने वाले साहित्य मनीषी भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ की 92वीं जयंती पर सुरभि संस्था की ओर से आयोजित साहित्यिक समारोह में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का भावपूर्ण स्मरण किया गया। साहित्यकारों ने कहा कि ‘विनोद’ का साहित्य केवल हास्य-विनोद तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें अपने समय के सामाजिक यथार्थ, विसंगतियों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक समरसता की गहरी चिंता दिखाई देती है।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ ने व्यंग्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनने दिया, बल्कि उसे समाज के आईने के रूप में इस्तेमाल किया। उनकी रचनाओं में सहज हास्य के साथ व्यवस्था और सामाजिक विसंगतियों पर पैनी दृष्टि दिखाई देती है। यही कारण है कि समय बीतने के बावजूद उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक और पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करने वाला है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। उन्होंने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी रचनाओं में जीवन के विविध रंगों के साथ समाज की वास्तविक तस्वीर भी दिखाई देती है। तिवाड़ी ने कहा कि ‘विनोद’ की रचनात्मकता में संवेदना, सहजता और प्रभावशाली अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय था।
विशिष्ट वक्ता व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि ‘विनोद’ ने साहित्यिक व्यंग्य के माध्यम से समाज को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके साहित्य में सामाजिक सरोकारों के साथ गहरी मानवीय संवेदनशीलता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ के व्यक्तित्व और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उनके अप्रकाशित साहित्य को सामने लाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
समारोह में ‘विनोद’ के कृतित्व पर राजाराम स्वर्णकार, डॉ. नमामीशंकर आचार्य और ओमप्रकाश सारस्वत ने पत्र-पाठ किया। पत्र-पाठ के माध्यम से उनके साहित्य के विविध पक्षों, सामाजिक सरोकारों और रचनात्मक दृष्टि को सामने रखा गया। संस्था अध्यक्ष गोविन्द जोशी ने भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ की रचनाओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति देकर समारोह के वातावरण को भावमय बना दिया। सुरभि संस्था के सचिव दिनेश उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की साहित्यिक गतिविधियों एवं प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों की स्मृति को जीवित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम उनकी रचनाओं का पाठ और उनके साहित्य पर सार्थक संवाद है। समारोह में ‘विनोद’ की प्रतिनिधि रचनाओं का श्रोता-शैली में पाठ किया गया। राजेंद्र स्वर्णकार एवं विद्यासागर पंचारिया ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। उनके काव्य पाठ ने समारोह को साहित्यिक गरिमा प्रदान की और उपस्थित साहित्यप्रेमियों को भाव एवं शब्द की सघन अनुभूति से जोड़ा।
समारोह में साहित्य और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रेम नारायण व्यास, अंतर्यामी साहित्यिक सामायिक क्लब से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा चित्रकार योगेंद्र कुमार पुरोहित और लोक साहित्य एवं लोक कला के उन्नयन के लिए समर्पित समाजसेवी प्रेम नारायण व्यास को ‘सुरभि सम्मान’ अर्पित किया गया।को ‘सुरभि सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप शॉल, श्रीफल, पुस्तकें एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट किए गए। इस अवसर पर डॉ. सुमन बिस्सा, सरोज बिस्सा, डॉ. विष्णुदत्त जोशी सहित अनेक साहित्यकार, रचनाकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित जनों ने ‘विनोद’ के साहित्य को आज के सामाजिक परिवेश में भी प्रासंगिक बताते हुए उनके साहित्य के व्यापक पाठ एवं पुनर्पाठ की आवश्यकता जताई। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरोहित एवं राजा सांखी ने किया। अंत में सुमित शर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया।













