






बीकानेर/हनुमानगढ़ Abhayindia.com कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा आज ने अचानक हनुमानगढ़ जिले में फसलों का सत्यापन किया, जिसमें यह खुलासा हुआ कि बीज निर्माता कंपनी शंकर सीड्स ने ग्वार बीज उत्पादन के लिए जिस खेत का रजिस्ट्रेशन दिखाया था, वहां वास्तव में कपास की फसल उग रही थी। जिस व्यक्ति के नाम पर अनुबंध बताया गया, इस नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं है, वास्तविक खेत के मालिक को इस पूरे प्रकरण की कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन की प्रक्रिया में कंपनियों को बीज का पंजीकरण, खेत का पंजीकरण और फसल का सत्यापन जैसी कई औपचारिकताएँ पूरी करनी होती हैं, लेकिन इस मामले में कंपनी ने प्रत्येक चरण में धोखाधड़ी की है। जिस पर स्तर पर चूक हुई है, जो भी जिम्मेदार हैं उसके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
मंत्री मीणा ने निरीक्षण के बाद मीडिया को बताया कि कुछ महीने पहले श्रीगंगानगर में मैंने नकली बीज निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद बीज निर्माता फर्मों ने जांच पर सवालिया निशान लगाया था। उन्हीं के जवाब तलाशने के लिए मैं यहां आया हूं। मंत्री ने मीडिया के सामने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि हकीकत यह है कि कंपनियां खेतों की बजाय कागजों में प्रमाणिक बीज तैयार कर रही हैं।
हनुमानगढ़ के लखासर के पास 11 एलकेएस स्थित एक खेत का निरीक्षण करते हुए मंत्री ने बताया कि संबंधित बीज निर्माता कंपनी जयशंकर बीज श्रीगंगानगर को प्रमाणिक बीज तैयार करने का लक्ष्य दिया गया था। इसके तहत उक्त चक में रामस्वरूप व जगदीश के परिवार में सुदेश नाम के व्यक्ति के नाम पर लक्ष्य आवंटित कर दिया है। जबकि रामस्वरूप के परिवार में सुदेश नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। इतना ही नहीं रामस्वरूप का कोई बेटा भी नहीं है और कागजों में जिस चक में ग्वार के बीज तैयार करने का लक्ष्य आवंटित किया गया था, उसमें मौके पर कपास की फसल तैयार मिली।
मंत्री ने कहा कि इस तरह के करीब 40 साइट आसपास में और हैं। श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में करीब 800 लोकेशन पर बीज तैयार करने का काम हुआ है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के साथ कंपनियां धोखा कर रही हैं। किसानों के खेत से जो फसल वह साठ रुपए किलो खरीदते हैं, उसे फैक्ट्री में लाकर सीधे पैक करके 700 से 1000 रुपए प्रति किलो बेच रहे हैं। मंत्री ने कहा कि किसानों के साथ यह लूट है। सीएम से मिलकर इस फर्जीवाड़े की जांच एसओजी या सीबीआई से करवाने की मांग करूंगा। मंत्री ने कहा कि हैरानी की बात है कि इस गोरखधंधे में प्राइवेट कंपनियां ही नहीं सरकारी संस्थाएं भी लिप्त हैं। जिन सरकारी अफसरों की अनदेखी से उक्त कपंनियां चांदी काट रही हैं, उनको निलंबित या एपीओ करने की बजाय उनकी तनख्वाह रोकने तथा उनसे वसूली करने की कार्रवाई करने की बात कही।


