Friday, May 15, 2026
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बिनानी कन्‍या कॉलेज में परिचर्चा, हिन्दी राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान : डॉ. आचार्य

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बीकानेर Abhayindia.com हिन्दी भाषा केवल राष्ट्र नागरिकों एक माध्यम मात्र न होकर यह सम्पूर्ण राष्ट्र की अस्मिता की पहचान का प्रतीक है। हिन्दी भाषा एक वैज्ञानिक, वैश्विक मंच की सर्वसमर्थ भाषा है जिसमें विश्‍व समुदाय के अनगिनत मानव अपने सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच बनाकर अपना व्यक्तित्व निर्माण कर मानव सभ्यता का विकास कर रहे है। उक्त उद्गार बिनानी कन्‍या कॉलेज प्राचार्य डॉ. अरूणा आचार्य ने हिन्दी दिवस पर आयोजित परिचर्चा के दौरान व्यक्त किए।

इस अवसर पर विभिन्न संकायों की छात्राओं व विशेषकर हिन्दी साहित्य की अनेक छात्राओ ने अपने-अपने विचार श्रंखला में हिन्दी भाषा के उद्भव-विकास हिन्दी भाषा परिवार वैश्विक हिन्दी यका सामर्थ्य तथा तकनीकी क्षेत्र व अन्य क्षेत्रों में हिन्दी के बढ़ते वर्चस्व पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर हिन्दी प्रवक्ता डॉ घनश्‍याम व्यास ने छात्राओं को हिन्दी भाषा के बढ़ते सामार्थ्य का कारण समझाते हुए वैश्विक आर्थिक परिदृष्य में भारत विश्‍व का सबसे बड़ा बाजार है सांस्कृतिक दृष्टि से हिन्दी भारत की आत्मा है। ऐसे में आर्थिक व सांस्कृतिक मंच हिन्दी भाषा के विकास को सर्वोच्‍च विकास की ओर गतिमान करेंगे। हमें भी इसका भरपूर फायदा उठाना है। इसी क्रम में अनेक प्रवक्ताओं ने हिन्दी भाषा के कवियोंं, रचनाकारोंं, लेखकों व उनके भारतीय समाज के योगदान पर अपने विचार साझा किए।

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