विधायक डॉ. जोशी ने विधानसभा में उठाया राजस्थानी भाषा का मुद्दा

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जयपुर (अभय इंडिया न्यूज)। प्रदेश की विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बीकानेर पश्चिम के विधायक डॉ. गोपाल जोशी राजस्थानी भाषा को नियम 295 के तहत 8वीं अनुसूची में मान्यता दिलाने की मांग पुरजोर ढंग से उठाई। विधायक डॉ. जोशी ने कहा कि किसी भी देश व उनके राज्य की पहचान उसकी भाषा से होती है। हमारा भारत देश विविध धर्मों, सम्प्रदायों व भाषाओं वाला देश है, जो कि विविधता में एकता का संदेश देता है। देश के राज्यों की पहचान उसकी भाषा से होती है। जैसे कि पंजाब, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु एवं दक्षिण के कई राज्यों के साथ अन्य राज्यों में अपनी भाषाएं बोली जाती है। हमारे राजस्थान की बोली राजस्थानी को दुनिया में 12 करोड़ से अधिक लोग बोलते हैं व विदेशो तक फैले राजस्थानी लोग दूसरे लोगों को भी अपने राज्य के साथ ही भाषा के बारे में गर्व के साथ इसके गौरवमयी इतिहास को बतलाते हैं।
राजस्थान भाषा का दुनिया की भाषाओं में 25वां स्थान है व इसमें चार लाख हस्तलिखित ग्रन्थ और 134 रीति ग्रन्थ के साथ ही 49 शब्दकोश, कई व्याकरण की पुस्तकें तथा छह भागों में कहावत-कोश हैं। यह भाषा अभिव्यक्ति, सम्प्रेषण, समृद्धता के कारण भारतीय भाषाओं में अपनी अलग ही छाप छोड़ती है। इस भाषा में लिखित किताबों, कविताओं व साहित्यों को देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सम्मान के साथ पुरस्कृत किया गया। विदेशों में इस भाषा का प्रशिक्षण दिया जाता है। डॉ. जोशी ने कहा कि इस भाषा को 8वीं अनूसूची में अब तक मान्यता प्राप्त नहीं हुई है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है जबकि जिसके लिए काफी लम्बे समय से मांग की जा रही है।