पाटा बोला- ‘राबड़ी कैवे म्हनैं दांतों सूं खावौ’

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बीकानेर। चार धाम की यात्रा पूरी कर कई दिनों बाद पाटे पर पहुंचे मनिया महाराज बैठते ही बिना किसी भूमिका के बोले- ‘आज ठेसण सूं आवतां टैम दरवाजे खनै एक टैक्सी देखी, लिख्योडो हो साब नही साथी चाइजै।’ मनिया महाराज कुछ और बोलते उससे पहले जग्गू भा बात को काटते हुए बोले- ‘हां अबार ओ एक्टर भायलो कई टैम सू जोर कर रियो है, एसकी ले पड़े तो कोई बड़ी बात कोयनी। पण लैण में तो कता ई खड़ा है।’ इतने में सूना महाराज ने अपनी सून तोड़ते बोले- ‘कई कोयनी बाकी तो दुकानदारी है रै, कुण कैवतो अबकी बोट पड़सी जणै आ तो सावै जिसी बात हुईगी नी, अबै सावो है जणै घणाई बींद पोखिजण वास्तै मुंडा धोसी।’

खाना खाने के बाद गरारा करते पाटे पर पहुचे मधा महाराज मुँह से पानी का कुल्ला थूक कर बोल- ‘अरै कई कोयनी कांग्रेस में भी कई मुंडा धोयड़ा बैठा है। हल्दी रा गांठ ले र… पंसारी बणना चावै। सगलो रोळौ औ है कै राबड़ी कैवै म्हनै दांतों सूं खावो।’ मारे गरमी से पाटे पर शर्ट खोल कर बैठे भैरु महाराज को पूरी बात समझ नहीं आई, लेकिन बोलना तो है कुछ, इसलिए बोले- ‘राबड़ी तो इयै गरमी में दनुगे ही पिवणी चइजै पण म्हारै आ समझ मे आ आवै कोयनी इग्यारस में सेवयो कई काम खाली लुगायां रा टंटा है मनख मरै ए लुटावे।’ अब तक मौन धारण किये हुए लाला भा भी इस बहस में बीच मैदान में आ गए बोले- ‘भैरु तूं तो कोरो मुसळ है कोई दियाळी रा गावै जणै तूं होली रा गीत गावण लाग जावै, खोटी आदत है थारी। अबै सुण, अबै आ सरकार बोटो ने देख र नोकरयों लुटावैली टाबरो नै कैय दो म्होरी तो निभगी पढ़ लो नई जणै फोड़ा पावोला।’ -कोकड़दास (पाटै सूं लाइव)