Thursday, July 18, 2024
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अस्थमा रोग, उसकी पहचान, कारण व उपचार पर चिकित्सकों की प्रशिक्षण कार्यशाला

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Bikaner. Abhayindia.com आई.एन.पी.एन.आर.सी. और बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान रविवार को लालगढ़ के करणी भवन पैलेस में बच्चों में अस्थमा रोग, उसकी पहचान, कारण व उपचार पर चिकित्सकों की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विशेषज्ञ चिकित्सक स्लाइड, व्याख्यान व आपसी संवाद के माध्यम से बच्चों में अस्थमा रोग के उपचार के बारे में जानकारी बारे में जानकारी दी।

सुबह दस बजे से चार बजे तक चली कार्यशाला में निमस, जयपुर के प्रसिद्ध वरिष्ठ चिकित्सक प्रोफेसर डॉ. बी.एस. शर्मा ने विभिन्न स्लाइडों, व्याख्यान तथा आपसी संवाद के माध्यम से बताया कि अबोध व कम उम्र के बच्चों में अस्थमा का ईलाज चिकित्सकों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है। चिकित्सक बच्चों में स्नेह व सहानुभूति रखते हुए माता-पिता को विश्वास में लेकर सजकता से ईलाज करें। उन्होंने बताया कि हाल ही एक स्कूल के 2500 बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया उसमें 10 से 40 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी रूप में अस्थमा से पीड़ित मिले। देश-प्रदेश में यह आंकड़ा चिंता के साथ चिंतन के साथ लोगों में अस्थमा के प्रति जागृत रहने, बच्चों का नियमित इलाज करवाने का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सक, अस्थमा से पीड़ित बच्चों के अभिभावकों की इलाज के प्रति भ्रांतियों को दूर करें तथा बच्चों के स्वास्थ्य का सही परीक्षण कर, उनकी वंशानुगत इतिहास, रहन-सहन के तरीके की करें। जांच कर इलाज करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निजी व सरकारी अस्पतालों में सर्दी, जुकाम, निमोनिया व अस्थमा में नेम्बूलाइज करवाने का प्रचलन बढ़ गया है। बिना आक्सीजन, साफ-सफाई बिना किया गया नेम्बूलाइज से रोगी को कोई फायदा नहीं होता।

उन्होंने चिकित्सकों को सही तरीके नेम्बूलाइजन करवाने के तरीके का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने रोग की सही पहचान करने, उचित मात्रा में दवाई देने के बारे में भी स्लाइडों के माध्यम से तीन सत्रों में जानकारी दी।

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक नेशनल रेसपीरेटरी चैप्टर के राष्ट्रीय सचिव व जोधपुर एम्स के प्रोफेसर डॉ. जगदीश गोयल ने बच्चों में अस्थमा के ईलाज की नवीनतम तकनीक को स्लाइडों के माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि अस्थमा के लिए बिना किसी दुष्परिणाम वाली पंप वाली दवा बेहतर है। बच्चों के माता-पिता को ठीक से दमा रोग के बारे अभिभावकों को जागृत करें। बच्चों में दमा का दौरा पड़ने पर क्या करें, पंप से सही दवा लेने के तरीके से अवगत करावें, बच्चें के इलाज पर उनके अभिभावकों को ठीक होने का आत्म विश्वास के साथ आश्वासन दें। रोगी बच्चों की नियमित जांच व ईलाज करें।

एस.एन. मेडिकल कॉलेज जोधपुर के सहायक आचार्य (शिशु औषध विभाग) डॉ. हरि मोहन मीणा ने पांच वर्ष तक के बच्चों में होने वाली खांसी, सांस की तकलीफ, एवं सांस लेते समय बजने वाली सीटी से संबंधित बीमारियों के कारण व उपचार के बारे मेंं जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 5 वर्ष तक के बच्चों में अस्थमा हो सकता है, लेकिन लक्षण अन्य बीमारियों जैसे हो सकते है। चिकित्सक बच्चे की बीमारी के सही लक्षणों को पहचान कर उसका इलाज करें।

उन्होंने बताया कि सामान्य तया अस्थमा बीमारी से पीड़ित बच्चों के परिजन बिना चिकित्सक की सलाह के नेम्बूलाइज न करवाते है जो कभी घातक भी हो सकता है। ऑक्सीजन के साथ चिकित्सालय में ही आवश्यकता अनुसार चिकित्सक की सलाह पर नेम्बूलाइजेशन करवावें। अस्थमा रोगियों के लिए इन्वेहेलर थेरेपी से इलाज अधिक फायदेमंद रहता है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, से सम्बद्ध शिशु चिकित्सालय के डॉ.पवन डारा ने भी दो स्लाइड शो के माध्यम से अस्थमा से पीड़ित बच्चों की जांच, उनका इलाज, दवाई की मात्रा आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में विशेष अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पी.सी. खत्री ने कहा धुआं, धूल, लोगों के रहन सहन, खान-पान के बदलने से बच्चों में अस्थामा की बीमारी बढ रही है। कार्यशाला में विशेषज्ञ चिकित्सकों से ज्ञान व प्रेरणा लेकर बेहतर ईलाज करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सरदार पटेल मेडिकल कॉलेंज के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.आर.के.सोनी अध्यक्षता ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से चिकित्सकों को चिकित्सा की नई तकनीक का ज्ञान मिलता है। इस ज्ञान का उपयोग कर चिकित्सक अस्थमा रोगी बच्चों का बेहतर इलाज करें।

बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी के सचिव व कार्यशाला संयोजक, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने कार्यशाला के महत्व को उजागर करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में बीकानेर के प्रमुख निजी व सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक व रेजीडेंट चिकित्सकों ने हिस्सा लिया तथा वरिष्ठ चिकित्सकों से संवाद कर बेहतर चिकित्सा के संकल्प को दोहराया। बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह बिट्ठू ने बताया कि कार्यशाला में प्रशिक्षित शिशु रोग विशेषज्ञ अस्थमा के बारे में बेहतर इलाज व प्रबंधन कर पाएंगे।

कार्यशाला में पी.बी.एम. अस्पताल के पूर्व अधीक्षक व शिशु रोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. पी.के. बेरवाल, डा घनश्याम सिंह सेंगर, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. रेणु अग्रवाल, डा गजानंद तंवर, डा मुकेश बेनीवाल, डॉ. गौरव गोम्बर, डॉ.गौरव पारीक, डॉ. गौरव दाधीच, नोखा के डा किशन चौहान, नागौर के डॉ. आर.के. सुथार सहित अनेक शिशु रोग विशेषज्ञ व बीकानेर के पी.बी.एम. सहित अनेक निजी व सरकारी चिकित्सालयों के चिकित्सक हिस्सा लिया। अतिथि चिकित्सकों का डॉ. श्याम अग्रवाल व पवन डारा के नेतृत्व में उपस्थित वरिष्ठ चिकित्सकों ने स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया।

कार्यशाला स्थल पर सिपला कंपनी की ओर से श्वास संबंधित रोगों के उपचार से संबंधित विभिन्न उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में कंपनी के रीजनल मैनेजर अश्विनी माथुर, एरिया मैनेजर जगजीत सिंह, रामानुज, कान सिंह शेखावत व प्रशांत श्रीमाली ने विभिन्न उपकरणों की विशेषताओं से चिकित्सकों को अवगत करवाया।

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