Tuesday, May 26, 2026
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घड़ी की सुइयां 12 पर पहुंची, तो गूंज उठा ‘नंद के आनंद भयो…, देखें वीडियो…

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बीकानेर Abhayindia.com बुधवार रात को जब घड़ी की सुईयां 12 बजा रही थी, तो पूरा शहर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की, हाथी दीजे-घोड़ा दीजे और दीजे पालकी…के जयकारों से गूंज उठा। घर-घर में श्रद्धालुओं ने थालियां बजाकर कान्हा के जन्म की खुशियां मनाई। प्रसाद बांटा।

मौका था जन्‍माष्‍टमी पर्व का। इसी खुशी में बच्चों ने मटकियों से बनाए प्रतीकात्मक कंस का वध किया। कृष्ण के जयकारों से घर-घर गुंंजायमान रहा।

श्रद्धालुओं ने आरती के बाद पंचामृत का सेवन कर उपवास का पाराना किया। कोरोना के कहर के बीच में घरों में कृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। साथ ही इस महामारी से निजात दिलाने की प्रार्थना की।

संक्रमण का रहा साया…

कोरोना के फैलते प्रकोप के चलते इस बार जन्माष्टमी की झांकियों पर संक्रमण का साया रहा। गली-मोहल्लों, कॉलोनियों में इस बार सार्वजनिक रूप से कृष्ण जन्माष्टमी की झांकियां नहीं सजी। वहीं मंदिर बंद रहने के कारण लोगों ने अपने-अपने घरों के मंदिरों में ही सूक्ष्म रूप से झांकिया सजाई। उत्साहित कुछ एक बच्चों ने अपने घरों में ही झांकी सजाई।

सुबह से ही तैयारियां…

कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां घरों में सुबह से ही शुरू हो गई। महिलाओं ने घरों में ही कई तरह के व्यजंन, पकवान तैयार किए। रात को बाल स्वरूप कृष्णा का पंचामृत से अभिषेक किया गया। शृंगार के बाद पकवानों का भोग लगाया, महाआरती की गई।

मरुनायकजी के लाइव दर्शन…

कोरोना की पाबंदी के चलते शहर के बड़े कृष्ण मंदिरों में आमजन के प्रवेश पर रोक रही। मंदिरों में अंदर निज पुजारियों ने ही शृंगार, पूजन और आरती की। ठाकुरजी के छप्पन भोग लगाए। वहीं मरुनायक चौक स्थित मरुनायकजी के प्राचीन मंदिर से ठाकुरजी के लाइव दर्शन यू-ट्यूब के माध्यम से श्रद्धालुओं को कराए गए। आयोजन को लेकर ट्रस्ट के घनश्याम लखानी व अन्य ने भागीदारी निभाई।

बाजारों में रौनक फीकी…

कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर इस बार बाजारों में रौनक फीकी रही। झांकियां नहीं सजने के कारण खिलौनों की अस्थायी दुकानें भी नहीं सजी। वहीं ठाकुरजी के वस्त्र व शृंगार सामग्री की दुकानों पर भी खास बिक्री नहीं हुई।

ठाकुरजी के शृंगार व वस्त्र विक्रेता श्रीबल्लभ व्यास(पोला महाराज) के अनुसार प्रशासन की गाईड लाइन की पालना रही, इसके चलते निर्धारित समय तक ही दुकान खुली रखी, वहीं पर्व को देखते हुए इस बार ग्राहकी मंदी रही। कोरोना के बढ़ते संक्रमण का असर बिक्री पर रहा।

बच्चों में उत्साह…
सार्वजनिक रूप से जन्माष्टमी की झांकियां नहीं सजने के कारण घरों में रहकर ही बच्चों ने कान्हा का जन्मोत्सव मनाया, घर के मंदिर को सजाया, ठाकुरजी को नए वस्त्र पहनाएं, शृंगार किया। मंदिर में गुब्बारों व अन्य सजावटी वस्तुओं से सजाया।

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