Saturday, April 25, 2026
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लूणकरणसर का सहनीवाला बनेगा मिनी इजरायल, किसानों की बढ़ेगी आमदनी

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जयपुर Abhayindia.com शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी राजन विशाल ने बुधवार को बीकानेर के लूणकरणसर में स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्राह्य परीक्षण केन्द्र (एटीसी), आरओसीएल जैतून फार्म और ग्राम सहनीवाला में उन्नत उद्यानिकी तकनीक द्वारा बनाये जा रहे हाई-टेक हॉर्टिक्लचर मॉडल क्लस्टर का दौरा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी ने कृषि विज्ञान केन्द्र लूणकरनसर का दौरा कर संचालित की जा रही गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने वार्षिक कैलेण्डर अनुसार विश्वविद्यालय व कृषि उद्यान विभाग के परस्पर समन्वय से किसानों के लिए प्रभावी प्रशिक्षणों का आयोजन करवाने पर बल दिया। जिससे कृषि विज्ञान केन्द्र का समुचित लाभ क्षेत्र के किसानों को  ज्यादा से ज्यादा मिल सकें।

राजन विशाल ने जैतून फ़ार्म व तेल प्रसंस्करण इकाई आरोसीएल की गतिविधियों का निरीक्षण किया और जैतून उत्पादक किसानों से प्राप्त जैतून फल से समय पर तेल निकलवाने के लिए निर्देश दिए। जैतून फ़ार्म प्रभारी ने प्रसंस्करण इकाई स्थापना से अब तक उत्पादित तेल का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। इसके बाद शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी ने ग्राहय परीक्षण केन्द्र लूणकरनसर का भी निरीक्षण किया।

उन्होंने लूणकरणसर के ग्राम सहनीवाला का भी दौरा किया, जिसे उद्यान विभाग द्वारा उन्नत उद्यानिकी तकनीकी द्वारा मिनी इजरायल मॉडल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग द्वारा सहनीवाला को हार्टिकल्चर मॉडल क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। किसान उन्नत तकनीकी पॉली हाउस, शेडनेट हाउस, लॉ-टनल, प्लास्टिक मल्च, एकल जल स्त्रोत, सामुदायिक जल स्त्रोत, सोलर पम्प व ड्रीप संयंत्र अपना कर न्‍यूनतम लागत पर अच्छी पैदावार ले सकेंगे। जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और जीवन में सुधार होगा।

बीकानेर का ग्राम सहनीवाला ब्लॉक लूणकरणसर का हाई-टेक हार्टिकल्चर मॉडल क्लस्टर के लिए चयन किया गया है। जिसमे 30 चयनित कृषकों में से प्रत्येक कृषक को उच्च तकनीकी पॉली हाउस/शेडनेट हाउस, लॉ-टनल, प्लास्टिक मल्च, एकल जल स्त्रोत, सामुदायिक जल स्त्रोत, सोलर पम्प व ड्रीप संयंत्र में से पॉली हाउस/शेडनेट हाउस के साथ न्यूनतम अन्य कोई चार घटक से लाभान्वित किया जा रहा है। चयनित कृषक को पॉली हाउस स्थापना पर 2000 वर्गमीटर निर्धारित सीमा पर राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत लघु व सीमांत कृषकों को 95 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।

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