जैन जीवन शैली का आधार सम्यक दर्शन, सम्यक चरित्र और सम्यक ज्ञान : आचार्यश्री महाश्रमण

Acharyashree Mahashraman
Acharyashree Mahashraman

बीकानेर Abhayindia.com ‘सभी बलाएं है विप्लाएं पंडित सभी अपंडित है, नहीं जानते कैसे जीना, केवल महिमा मंडित है’। आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा है कि कलात्मक जीवन जीना ही जीवन है। जैन समाज की जीवन शैली का आधार सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान एवं सम्यक चरित्र है और यही मोक्ष का मार्ग है। आचार्यश्री महाश्रमण ने गुरुवार को जैन जीवन शैली पर प्रवचन देते हुए यह बात कही। आचार्य श्री गंगाशहर स्थित तेरापंथ भवन में प्रवास कर रहे हैं, प्रवास का आज उनका तीसरा दिन रहा, इस अवसर पर जैन धर्म से जुड़े श्वेताम्बर, दिगम्बर, मंदिर मार्गी सभी के लिए जैन जीवन शैली पर विशेष कार्यक्रम रखा गया।

आचार्यश्री महाश्रमण ने बताया कि जैन वांग्मय में सम्यक दर्शन, ज्ञान दर्शन, आचार्य कुमार  के तत्वार्थ सूत्र का महत्वपूर्ण सूत्र है, हम जिस मार्ग के अनुसार चलते हैं वही जीवन शैली हो जाती है और यही जैन जीवन शैली है। आचार्य श्री ने कहा कि आदमी जीवन जीता है, आदमी ही नहीं सृष्टि का हर प्राणी जीवन जीता है। जीवन जीना एक सामान्य बात है। एक करबद्ध  लक्ष्य के साथ सम्यक तरीके से जीवन जीना विशेष बात होती है। आचार्य श्री महाश्रमण ने अपने प्रवचन में जीवन शैली किस प्रकार की होनी चाहिए, जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए और जीवन आदमी कैसे जीए…?, इस पर विस्तारपूर्वक जानकारी देकर कहा कि इस देह को धारण किया है तो पूर्व कर्मों का क्षय करने के लिए जीवन जीएं, मोक्ष प्राप्ती के लिए जीवन जीएं। उन्होंने कहा कि एक मनुष्य ही है जो उत्तम साधना कर सकता है, इसलिए मोक्ष पा सकता है। आचार्य श्री ने देव गुरु धर्म के प्रति आस्था होना ही जैन जीवन शैली का सूत्र बताया है। उन्होंने तीनों दर्शन की व्याख्या विस्तार से कर कहा कि सम्यक दर्शन के लिए जीवन में नमस्कार महामंत्र को धारण करें, दिन में 21 बार इस मंत्र का जाप होना ही चाहिए। सम्यक ज्ञान के लिए जैन ग्रंथ हैं, उनका अध्ययन कर ज्ञान को पुष्ट करें, वाणी में मधुरता रखें, राग-द्वेश से दूर रहें, खान पान की शुद्धता रखें,शराब, नशा और मांसाहार ना करें, हिंसा ना करें, सभी से मैत्री भाव रखें यही जैन जीवन शैली है।

आचार्य श्री का किया स्वागत, वंदन, अभिनंदन

जैन महासभा के जैन लूनकरण छाजेड़ ने बताया कि प्रवचन से पूर्व गंगाशहर के सामसुखा परिवार की ओर से आचार्य श्री की श्रद्धा में गीत प्रस्तुत किया गया। वहीं स्वामी जयंत, मुनि राजकुमार ने गंगाशहर में जैन समाज के तेरापंथ धर्मसंघ के परिवारों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत कर बताया कि गंगाशहर में धर्मध्यान में वृद्धी के लिए चातर्मास की महत्ती आवश्यकता है। समणी जयन्त प्रज्ञा जी ने वंदन अभिनंदन किया। सन्मति प्रज्ञा ने ‘प्राणों में उतरे हो, नव-नव रूप लिए तुम’ कविता से भावाभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला के बच्चों ने स्वागत गीत ‘तेरापंथ प्रणेता, जय…जय हो’, साध्वी कीर्तिलता जी एवं साध्वी वर्या जी ने कहा कि जैन जीवन दर्शन में सर्वोत्तम व सर्वश्रेष्ठ कला जीवन जीने की कला है। उन्होंने जैन जीवन शैली जो अपनाए, वो सुख पाए, गुरुदेव का रचित गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक – श्राविकाओं ने आचार्य श्री महाश्रमण से गुरु शिक्षा लेकर उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा ली!

जैन महासभा के सुरेन्द्र जैन ने जैन सभा के कार्यकलापों की जानकारी देते हुए सकल जैन समाज के द्वारा एक दूसरे के आयोजन में दी जा रही सहभागिता की जानकारी दी एवं इसके लिए भरे पंडाल में जैन लूनकरण छाजेड़ की प्रशंषा करते हुए इसके लिए दिए जा रहे उनके योगदान को उल्लेखित किया।

स्थानक वासी समाज की ओर से भाजपा नेता मोहन सुराणा ने जैन महासभा के संयुक्त तत्वावधान में पिछले 15  वर्षों से किए जा रहे भगवान महावीर जयंती एवं पर्यूषण पर्व में सकल जैन समाज के दिए योगदान के बारे में आचार्य श्री महाश्रमण को अवगत कराया। साथ ही कोरोना काल में मानवहित में किए गए कार्यों की जानकारी भी दी। जैन दिगम्बर समाज की ओर से अध्यक्ष एडवोकेट विनोद जैन ने आचार्य श्री का अभिनंदन कर चातर्मास बीकानेर के गंगाशहर में करने का अनुरोध किया। श्री जैन महासभा के जैन लूनकरण छाजेड़ ने कहा कि जैन- अजैन समाज चाहता है कि आचार्य श्री महाश्रमण का चातर्मास गंगाशहर- बीकानेर का चोखला में हो, आपकी कृपा हो जाए तो हम अपने जीवन को भाग्यशाली समझेंगे। आचार्य श्री तुलसी की महाप्रयाण भूमि, युवाचार्य से युवाश्रमण की बनने की भूमि, जहां साध्वी प्रमुखा के रूप में कनक प्रभा का चयन हुआ,  महाप्रज्ञ जी की तपोभूमि पर एक चातुर्मास हो की मांग पर उपस्थित जनसमूह ने एकास्वर में ‘ऊं अर्हम’ की ध्वनी से समर्थन दिया। बीकानेर स्टॉक ए1सचेंज के श्रीराम अग्रवाल ने भी आचार्य से गंगाशहर में चातर्मास करने की विनती की है।

ज्ञानशाला के नन्हें बच्चों ने संस्कृत में नाट्यशैली के साथ संवाद कर गीत प्रस्तुत कर गंगाशहर में चातर्मास का  आग्रह किया। ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं ने ज्योतिचरण की जय-जय, समूह गीत प्रस्तुत किया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के मंत्री रतनलाल छलाणी ने सभा द्वारा किए जा रहे कार्य-कलापों से आचार्य श्री को अवगत कराया। हंसराज डागा ने सभी आगंतुकों को आचार्य तुलसी के महाप्रयाण दिवस पर आचार्य तुलसी समाधी स्थल पर होने वाले कार्यक्रम की जानकारी देकर सभी से पधारने का अनुरोध किया। विनय- सारिका चौपड़ा, अशोक सेठिया, जेठमल- मधु छाजेड़ सहित श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्य श्री का वंदन-अभिनंदन किया।

डॉ. व्यास की आचार्य महाप्राकृत रत्नपाल चरितम का अवलोकन किया

आचार्य श्री महाश्रमण के जीवन पर शोद्य कर उन पर लिखी पुस्तक ‘आचार्य महाप्राकृत रत्नपाल चरितम, एक समीक्षात्मक अनुशीलन’ शोद्यग्रंथ शोद्यकर्ता डॉ. मेघना व्यास ने आचार्य श्री महाश्रमण के समक्ष प्रस्तुत की, आचार्य श्री ने पुस्तक का अवलोकन भी किया। इस पुस्तक का शोद्यकार्य डॉ. मेघना ने  महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय द्वारा किया है।शोधार्थिनी डा. मेघना व्यास ने आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा रचित पुस्तक ‘रत्नपालचरितम् एक समीक्षात्मक अनुशीलन शोध की पुस्तक पूज्यचरणों में समर्पित कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया

आचार्य श्री पहुंचे बोथरा भवन

आचार्य श्री महाश्रमण ने लगातार तीन दिन गंगाशहर के तेरापंथ भवन में विहार कर गुरुवार की शाम बोथरा भवन पहुंचे। आचार्य श्री का रात्रि विश्राम भवन में होगा, शुक्रवार सुबह आचार्य श्री शोभायात्रा के साथ आचार्य तुलसी समाधी स्थल ‘नैतिकता का शक्तिपीठ पर पहुंचेंगे, जहां आचार्य तुलसी के 26वें महाप्रयाण दिवस पर श्रद्धार्पण समारोह एवं धम्म जागरण कार्यक्रम होगा।

प्रबुद्धजनों की जिज्ञासाओं का किया समाधान

आचार्यश्री महाश्रमण ने बुधवार की शाम तेरापंथ भवन में आयोजित हुए प्रबुद्धजन स6मेलन में शहर के गणमान्यजनों के साथ संगोष्ठि आयोजित कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी संभागीय आयुक्त नीरज के पवन, जिला कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल, आईजी ओमप्रकाश, सीओ सिटी दीपचंद, कोटगेट थानाधिकारी मनोज माचरा, चन्द्रशेखर श्रीमाली, बिट्ठल बिस्सा, सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजनों ने भाग लिया। कार्यक्रम में  न्यायाधीश  महेश शर्मा, पत्रकार सुरेश बोड़ा, हेम शर्मा, डॉ. सुधा आचार्य, बाफना अकादमी के सीइओ  पी.एस. बोहरा ने अपनी जिज्ञासाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में आयकर अधिकारी  प्रमोद के. देवड़ा, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर विनोद कुमार, वृत्ताधिकारी दीपचन्द, वास्तुविज्ञ  आर.के. सुथार, शिक्षाविद् डॉ. पन्नालाल हर्ष, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के डॉ. गिरिराज हर्ष, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष  सुरेन्द्र पाल, एडवोकेट अजय पुरोहित, लेखक डॉ. अजय जोशी, कवि गिरिराज पारीक, राजाराम स्वर्णकार, पूर्व महापौर नारायण चौपड़ा, कार्डियोलॉजी विभाग के डा.  पिन्टू नाहटा, गैस्ट्रोलॉजी विभाग के डॉ. सुशील फलोदिया, सर्जन डा. संजय लोढ़ा, चिकित्सक होमियोपैथिक विभाग डा. चारूलाल शर्मा, प्राइवेट स्कूल ऐसोसिएशन राजस्थान (पेपा) के अध्यक्ष  गिरिराज खैरीवाल, प्राचार्य  प्रदीप लोढ़ा, अखिल भारतीय अल्पसंख्य आयोग के  सलीम भाटी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के टेकचन्द बरड़िया, राजेन्द्र अग्रवाल, सी.बी.एस. अस्पताल के डा.  एन.के.दारा, भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के एएसपी रजनीश पुनिया, कार्डियोलाजिस्ट डा. आर.एल. रांका, नेत्र रोग विभाग के डा. जीसी जैन के अलावा अनेकों लेखन, कला, साहित्य, नाट्य, उद्योग, शिक्षा, व प्रशासनिक कार्यों से जुड़े विशिष्टजन मौजूद थे। उपस्थित जन का  अमरचन्द सोनी, महावीर रांका व मनीष छाजेड़ ने साहित्य  भेंटकर सम्मानित किया ।

जवानों को दिया आध्यात्मिक ज्ञान

गुरुवार को प्रातः  बीएसएफ के 100 से अधिक जवान डीआईजी पुष्पेन्द्र सिंह व सिविल एयरपोर्ट अधिकारी अनिल शुक्ला के  नेतृत्व में आचार्यश्री से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए उपस्थित हुए। आचार्यश्री ने जवानों को पावन प्रेरणा प्रदान की और आचार्यश्री की अनुज्ञा से मुनि कुमारश्रमण ने उन्हें ध्यान-योग के प्रयोग द्वारा अपने चित्त को शांत और एकाग्र बनाने की विधि बताई।