ऐतिहसिक पात्र जनमानस की चेतना का हिस्सा बनते जा रहे हैं : प्रो. दिलबाग सिंह

बीकानेर Abhayindia.com आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रमों के अंतर्गत राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, कला संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा शैक्षणिक कार्यक्रमों के तहत आज ओंकार चैरिटेबल ट्रस्ट, कोलकाता के सहयोग से ‘‘सुनी-पढ़ी-लिखी श्रृंखला’’ के अन्तर्गत 5 अगस्त को शैक्षणिक वार्ता आयोजित की गई। वार्ता में प्रो. दिलबाग सिंह, जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय नई दिल्ली मुख्य वक्ता रहे। वार्ता का संचालन प्रो. तनुजा कोटियाल, डाॅ.बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली द्वारा किया गया।

इस वार्ता के माध्यम से प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने राजस्थान के इतिहास से जुड़े विभिन्न आयामों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला और इतिहास की पुनव्र्याख्या के लिए स्थानीय गैर-अभिलेखीय स्रोतों पर विशेष रूप से जोर दिया। उनका कहना था कि राजस्थान के इतिहास के ऐसे बहुत से पक्ष है जिन पर अभी तक ऐतिहासिक दृष्टि से अधिक नहीं लिखा गया है आज वर्तमान में ऐतिहासिक पात्र जनमानस की चेतना का हिस्सा बनते जा रहे है। आज आवश्यकता है कि वर्तमान की जरुरत के अनुसार नवीन स्रोतों के आधार पर इतिहास लिखा जाए। राजस्थानी भाषा के स्रोत केवल राजस्थान के इतिहास पर ही प्रकाश नहीं डालते बल्कि सम्पूर्ण उत्तर व मध्य भारत के इतिहास की जानकारी देते है। इस चर्चा में भारत के विभिन्न राज्यों से ऑनलाइन प्रतिभागी भी जुड़े।

संस्थान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डाॅ. नितिन गोयल ने बताया कि इस वार्ता का संचालन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मोड में किया गया था। ऑनलाइन प्रसारण प्रतिष्ठान के यूट्यूब तथा फेसबुक प्लेटफाॅर्म के जरिए प्रसारित किया हुआ। इस चर्चा में देश के 12 राज्यों से 270 से अधिक प्रतिभागियों ने एवं सिंगापुर, अमेरिका और आस्ट्रेलिया से भी हिस्सा लिया। बीकानेर से गिरिजाशंकर शर्मा, मोहम्मद फारुक, महेन्द्र पंचारिया, एम.एल. जांगिड़, भास्कर वैष्णव, राजेन्द्र कुमार, अजय कुमार आदि प्रतिष्ठान में प्रत्यक्ष रुप से जुडे़। कार्यक्रम के अन्त में प्रतिष्ठान द्वारा आगंतुकों की उपस्थिति में ‘‘हर घर तिरंगा’’ पोस्टर का विमोचन किया गया।