Hometrendingगेट से गल्ले तक वास्तु ही तय करेगा ग्राहक टिकेगा या खिसकेगा...

गेट से गल्ले तक वास्तु ही तय करेगा ग्राहक टिकेगा या खिसकेगा…

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दो दुकानें, एक ही मार्केट, एक ही सामान, एक ही रेट। एक पर भीड़, दूसरी पर सन्नाटा। क्यों? ग्राहक प्रोडक्ट नहीं, फील खरीदता है। और वो फील बनाता है आपका वास्तु। अच्छा वास्तु ग्राहक को रोकता है, खराब वास्तु टोकता है। आपने कभी सोचा है, कुछ दुकानों में घुसते ही मन कहता है थोड़ा और रुक जाऊं और कुछ दुकानों में घुसते ही घुटन लगने लगती है? ये मन का वहम नहीं, वास्तु का विज्ञान है। ग्राहक को आपका सामान बाद में दिखता है, पहले आपकी जगह की ऊर्जा दिखती है। अगर दरवाजा ही उलझा हुआ है, हवा ही रुकी हुई है, तो ग्राहक भी रुकेगा नहीं। वास्तुशास्त्र के अनुसार, हर दिशा का एक स्वभाव है। मुख्य द्वार आकर्षण का, ईशान ज्ञान का, नैऋत्य स्थिरता का और आग्नेय ऊर्जा का केंद्र है। जब ये केंद्र बिगड़ते हैं, तो ग्राहक का प्रवाह भी बिगड़ जाता है। इसीलिए समझदार व्यापारी पहले बोर्ड नहीं, अपनी दिशा सुधारता है।

वास्तु कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि पंचतत्वों, दिशा, प्रकाश, हवा और गति के संतुलन का विज्ञान है। मुख्य द्वार कहाँ है, काउंटर कहाँ रखा है, ग्राहक का रास्ता कहाँ से है, रोशनी कैसी है – ये छोटी-छोटी बातें ही तय करती हैं कि ग्राहक अंदर आएगा या बाहर से ही लौट जाएगा। यदि आपकी दुकान, शोरूम या ऑफिस में ग्राहकी उम्मीद से कम है, तो एक बार बोर्ड और बजट से पहले अपनी जगह को भी जांच लीजिए। कई बार तोड़-फोड़ की नहीं, सिर्फ थोड़ी सी व्यवस्था बदलने की जरूरत होती है।

दस वास्तु सूत्र जो ग्राहकी बढ़ाते हैं...

1. मुख्य द्वार आपका पहला विज्ञापन द्वार साफ, रोशन और बाधामुक्त रखिए। सामने कूड़ेदान, टूटा सामान, स्टॉक के कार्टन मत रखिए। हैंडल, लॉक, लाइट सब दुरुस्त रखें। ग्राहक को लगे कि अंदर आना आसान है।

2. उत्तर-पूर्व दिशा को हल्का और खुला रखें। उत्तर और पूर्व दिशा में भारी अलमारी, बंडल, डेड स्टॉक ठूंसने से दुकान सिकुड़ी हुई लगती है। इसे सबसे हल्का, साफ और उजला रखें।

3. मालिक की पीठ पर ठोस दीवार हो और चेहरा पूरे शोरूम की तरफ हो। पीठ सीधे मुख्य द्वार की तरफ कभी न हो। इससे पूरे स्टोर पर नजर भी रहती है और स्थिरता भी आती है।

4. नैऋत्य कोण [दक्षिण-पश्चिम] को भारी और स्थिर रखें । इस कोने को खाली मत छोड़िए। यहाँ भारी अलमारी, लॉकर, महत्वपूर्ण फाइलें रखें। ये स्थिरता का कोना है। ध्यान रहे अग्नि सुरक्षा और बिल्डिंग की क्षमता का ख्याल जरूर रखें।

5. आग्नेय कोण [दक्षिण-पूर्व] में अग्नि तत्व चाय-कॉफी मशीन, पेंट्री, बिजली के मीटर, हीटर जैसे गर्म उपकरणों के लिए यही जगह सबसे उपयुक्त है।

6. ग्राहक का रास्ता मत रोकिए गेट से घुसते ही काउंटर अड़ा देना सबसे बड़ी गलती है। ग्राहक के चलने का रास्ता चौड़ा, साफ और घुमावदार रखें ताकि वो पूरी दुकान देख सके।

7. अंधेरी, घुटन भरी दुकान में कोई नहीं रुकता। जहाँ तक हो सके प्राकृतिक रोशनी आने दें, हवा का क्रॉस वेंटिलेशन रखें। बहुत तेज या बहुत धीमी नहीं, बिजनेस के हिसाब से संतुलित लाइट रखें।

8. हर बिजनेस का रंग अलग होता है। बच्चों की दुकान में चटक रंग चलते हैं, ज्वेलरी शोरूम में रॉयल और सॉफ्ट रंग। अपने ग्राहक वर्ग के हिसाब से रंग चुनें।

9. केवल अंदर ही नहीं, बाहर भी देखिए। सामने बड़ा खंभा, कचरे का ढेर, टूटी सड़क, अंधेरा ये सब ग्राहक को अंदर आने से रोकते हैं। बाहर की लाइटिंग और साइनेज दमदार रखें।

10. गल्ले का वास्तु गल्ले में क्या रखें कुबेर यंत्र विधिवत पूजित,चांदी का सिक्का, दीपावली पूजन का हल्दी की गांठ पीले कपड़े में बांधकर, गोमती चक्र पूजित, लक्ष्मी जी का छोटा चित्र साफ, बिना मुड़ा हुआ।

गल्ले में क्या न रखें? पुराने
बिलों, रद्दी की भीड़

फटे-पुराने नोटों का ढेर, खाने-पीने का सामान या खुला प्रसाद। वास्तु कोई एक फॉर्मूला नहीं जो हर दुकान पर चिपका दिया जाए। कपड़े का शोरूम, किराना दुकान और ऑफिस तीनों का वास्तु अलग होगा। सबसे अच्छा वास्तु वही है जहाँ दिशा, व्यवस्था, स्वच्छता, रोशनी और ग्राहक का आराम – ये पाँचों एक साथ मिल जाएं। वास्तु को अपनाइए, अंधविश्वास को नहीं। -सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431

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