Saturday, April 25, 2026
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नशे की लत परिवार, समाज तथा पूरे राष्ट्र को पहुंचा रही है नुकसान : डाॅ. झाझड़िया

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बीकानेर Abhayindia.com ‘वर्तमान में नशा न केवल युवाओं के विनाश का कारण है अपितु नशे की लत परिवार, समाज तथा पूरे राष्ट्र को क्षति पहुंचा रही है।’ ये कथन बीजेएस रामपुरिया जैन विधि कॉलेज (BJS Rampuriya Jain Law College) परिसर में राष्ट्रीय सेवा योजना की दोनों इकाईयों द्वारा आयोजित नशा मुक्ति प्रयास एवं समाधान विषय पर एक दिवसीय शिविर के दौरान रखी गई गोष्ठी में मनोचिकित्सक डाॅ. अविनाश झाझड़िया ने कहे।

डाॅ. अविनाश झाझड़िया ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन में इस बात को लेकर संकल्पित होना चाहिए कि वे किसी भी प्रकार के नशे से अपने आप को दूर रखेंगे। डाॅ अविनाश ने सभी स्वयंसेवकों को बताया कि कोई भी प्रकार का नशा छोटा या बडा नहीं है प्रत्येक नशे के गंभीर दुष्परिणाम है जिसे युवा को स्वयं को तथा उसके परिवार को भुगतने पडते है और अन्तोतगत्वा पूरा समाज तथा राष्ट्र इसके दुष्परिणामों से आहत होता है।

डाॅ. अविनाश झाझड़िया ने बताया कि धूम्रपान तथा तम्बाकू का नशा 1000 प्रकार की बीमारियों का कारण है। इसलिए इस प्रकार के सभी नशों से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति सजग होकर इनसे दूर रहना ही इसका वास्तविक समाधान है। उन्‍होंने स्वयंसेवकों को नशे के कारणों, लक्षण तथा रोकथाम के उपायों के बारे में विस्तार से समझाया तथा बताया कि समय रहते जागरूक होकर चिकित्सकीय सलाह से नशे की लत से होने वाले दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।

गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए रासेयो के कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. रीतेश व्यास ने स्वयंसेवकों को बताया कि वर्तमान में युवा वर्ग जो नशे का आदी हो रहा है उसका मुख्य कारण अति महत्वाकांक्षा और संगति है अतः सभी विद्यार्थियों को चाहिए कि वे बुरी संगति का त्याग कर नशे तथा उससे होने वाली समस्याओं से दूर रह सकते है। कार्यक्रम के अन्त में सभी स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों तथा उपस्थित व्यक्तियों ने नशा न करने तथा लोगों को नशा मुक्ति के लिए जागरूक करने के लिए शपथ ली।

इस अवसर पर रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. बालमुकुन्द व्यास, महाविद्यालय के व्याख्याता डाॅ. शराफत अली, डाॅ. प्रीति कोचर, डाॅ. पीयूष किराडू, सुनीता लूणिया, अन्जूमन उस्ता, चेतना ओझा, राजश्री सुथार, राकेश रंगा तथा महाविद्यालय के विद्यार्थी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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