Thursday, May 14, 2026
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85 साल पुराने सरकारी छापाखाने पर ‘ताला’ लटकाने का विरोध

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बीकानेर (अभय इंडिया न्यूज)। बीकानेर के 85 साल पुराने सरकारी छापाखाने यानी राजकीय मुद्रणालय पर ताला लगाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार इस छापाखाने को घाटे का सौदा बताते हुए इसे म्युजियम में तब्दील करने जा रही है। छापाखाने में वर्तमान में करीब पचास ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन्हें दूसरे विभागों में समायोजित किया जाएगा। छापाखाना बंद होने की सूचना के बाद कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो रहा है। कर्मचारियों का शिष्टमंडल हाल में इसके लिए राजधानी जयपुर भी गया था। जहां उन्होंने मुद्रण एवं लेखन सामग्री निदेशक यज्ञ मित्र देव से मुलाकात की, लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। यानी सरकार छापाखाने को हर हाल में बंद करने का पूरा मन बना चुकी है।
राजस्थान अधीनस्थ कर्मचारी संघ के शाखा अध्यक्ष प्रेमरतन जोशी, सचिव भूपेश चंद्र पारीक, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश भादाणी ने बताया कि छापाखाने को बंद करना उचित नहीं है। यहां अभी भी सरकारी कार्यालयों से जुड़े प्रिटिंग के काम हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले वर्ष 2000 में भी तत्कालीन सरकार ने इसे बंद करने का प्रयास किया था। तब स्थानीय राजनेताओं और राज परिवार से राजमाता सुशीला कुमारी ने विरोध किया था। बाद में सरकार ने इसे बंद करने का निर्णय टाल दिया था, लेकिन अब सरकार इसे बंद करने पर आमादा हो रही है। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि अब वे भाजपा विधायक सिद्धिकुमारी से मिलकर उनसे छापाखाना बंद नहीं कराने का अनुरोध करेंगे।

अब ये हो रही तैयारी
राजकीय मुद्रणालय को अब विश्व स्तरीय अभिलेख म्युजियम में तब्दील करने की तैयारी चल रही है। यहां रियासतकालीन मूल दस्तावेजों को सजाने के लिए गैलरियां बनाई जाएंगी। छापाखाना में रखी 105 साल पुरानी ट्रेडल प्रिंटिंग मशीन भी दर्शकों के अवलोकनार्थ सजाई जाएगी। ये मशीनें बीकानेर स्टेट के पूर्व महाराजा गंगासिंह ने वर्ष 1913, 1918 और 1925 में विदेश से मंगवाई थी। म्युजियम के काम पर राज्य सरकार ने लगभग 11 करोड़ रुपए खर्च करेगी। छापाखाने का निर्माण वर्ष 1932 में करवाया गया था।

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