








बीकानेरAbhayindia.com केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आह्वान पर केन्द्रीय कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बुधवार को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला कलक्टर को सौंपा।
श्रमिक नेताओं ने कहा कि केन्द्रीय ट्रैड यूनियन के आव्हान पर सरकार की नीतियां किसान व मजदूर विरोधी, जनविरोधी है। प्रदर्शन में एआईबीईए, रेल, इंटक , एटक, सीटू, राजस्थान सीटू के पदाधिकारी शामिल हुए।
श्रमिक नेता वाईके योगी ने रोष जताते हुए कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने देश के मजदूरों-किसानों पर असंवैधानिक रूप से अध्यादेश विधेयक बिल पारित किया गया।
योगी के अनुसार सरकार की दमनात्मक नीतियों के विरोध में समस्त संगठनों ने आगामी 25 सितंबर को किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन करने के लिए लामबंद हैं । भारतीय श्रम सम्मेलनों के निर्णय को मानने और लागू करने से सरकार मुकर रही है।
अब तो भारत सरकार ने संविधान विरूद्ध जाकर भारतीय श्रम सम्मेलनों का आयोजन बंद कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि अभी हाल ही में भारतीय किसानों को बर्बाद करने वाले तीन विधेयक और 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर,श्रम सुधारों के नाम पर लाए जा रहे, चार बिल किसानों और मजदूरों के लिए घातक होंगे। संगठन इसका पूरजोर विरोध करता है।
निजीकरण हो रहा हावी…
इंटक नेता रमेश व्यास ने कहा कि बिजली, रेल सहित अन्य क्षेत्रों में यह सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, श्रम कानूनों को मालिकों के पक्ष में संशोधित कर रही है। इसके खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है।
इसमें बैंक से वाईके शर्मा, रामदेव राठौड़, इंटक केअशोक पुरोहित,शिव नारायण पुरोहित, महेंद्र देवड़ा, हेमन्त किराडू, एटक के प्रसन्न कुमार, सीटू के मूलचंद खत्री, रेल के अनिल व्यास, रोडवेज के गिरधारी शर्मा, अब्दुल रहमान कौहरी आदि शामिल हुए।
ज्ञापन के जरिए यह बताया…
मंदी में फसी अर्थव्यवस्था में मजदूरों सहित आयकर नहीं देने वाली आम आवाम को दस हजार रुपए महिना दिया जाए, मजदूरों की कटौती वापस लें,बेरोजगारों को रोजगार शीघ्र मुहैया कराएं, जबरन सेवानिवृत्त आदेश वापस लेने, रेल में 151 ट्रेनों को निजी हाथों में देने का आदेश वापस लिया जाए, राष्ट्रीय संपदा की सुरक्षा करने, जबरदस्ती वेतन कटौती आदेश वापस लेने, बैंकों को मजबूत बनाने सहित मांगे रखी गई।


