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संसोलाव तालाब की आगोर में डाला जा रहा मलबा, तारबंदी तोड़ी, न्यायालय के आदेश की नहीं हो रही पालना

बीकानेर Abhayindia.com बीकानेर के ऐतिहासिक संसोलाव तालाब की आगोर पर संकट मंडरा रहा है। आगोर में लगातार गंदे कचरे का मलबा डाला जा रहा है। मलबा डालने वाले ट्रैक्टर चालकों ने यहां लगी तारबंदी तोड़ दी है। आगोर संरक्षकों की ओर से विरोध दर्ज कराने के बावजूद वे अपनी मनमानी कर रहे हैं। बरसाती पानी के नालों में लगातार मलबा गिराए जाने से इस बार तालाब में पानी की आवक नहीं के बराबर रह गई है।

madan mohan Chagani
आगोर पर मलबा डालने से मना करते हुए संसोलाव आगोर एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के संयोजक मदन मोहन छंगाणी
2012 के न्यायालय आदेश की अवहेलना

संसोलाव आगोर एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के संयोजक मदन मोहन छंगाणी ने बताया कि जिला राजस्व न्यायालय बीकानेर द्वारा पारित आदेश दिनांक 28.06.2012 के अनुसार संसोलाव तालाब आगोर भूमि के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन एवं नगर विकास न्यास बीकानेर को पाबंद किया हुआ है। इसके बावजूद यहां प्रतिदिन लगभग 10 ट्रॉली कचरा डाला जा रहा है, जिससे बीकानेर के ऐतिहासिक संसोलाव तालाब का अस्तित्व संकट में है।

बीमारियों का खतरा

आगोर संरक्षकों का कहना है कि तालाब क्षेत्र में गंदे कचरे के ढेर होने से बीमारियां फैलने का खतरा उत्पन्न हो रहा है। इसके बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान आकर्षित नहीं कर रहा है।

अतिक्रमण से रुकी पानी की आवक

आपको बता दें कि बीकानेर का प्राचीन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। इसके पास ही स्थित है ऐतिहासिक संसोलाव तालाब। इस तालाब में आज भी बारिश का पानी आता है, लेकिन उतना नहीं आता जितना पहले आता था।

इसकी सबसे बड़ी वजह है आगोर पर हुए अतिक्रमण। इस तालाब की आगोर की जमीन करीब 328 बीघा है, लेकिन इसमें से काफी जमीन पर अतिक्रमण हो गए हैं। जिससे बरसाती पानी की आवक अब बहुत ही कम हो गई है। शहर के पर्यावरणविदों ने इस आगोर को अतिक्रमियों से बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है, इसके बावजूद अब भी काफी जमीन अतिक्रमण की जद में है। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से यह प्राचीन जगह अब बदहाली के आंसू बहा रही है।

पर्यावरणविदों ने उठाया बीड़ा, उगा
दिए पीपल के सवा सौ विशाल पेड़

श्री काशी विश्वनाथ महादेव मंदिर के तालाब की आगोर को अतिक्रमण से बचाने के लिए स्वर्गीय दाऊलाल छंगाणी की अगुवाई में पर्यावरणविदों ने यहां पेड़ लगाने की मुहिम करीब एक दशक पहले शुरू की थी।

आगोर के एक हिस्से में नीम आदि के करीब पांच सौ से ज्यादा पेड़ लगाए गए। वहीं दूसरे चरण में पीपल पार्क विकसित किया गया। जहां करीब सवा सौ पीपल के पेड़ लगाए गए।

बैसाख के महीने में 108 पीपल के पेड़ के पूजन की मान्यता है। यहां महिलाएं एक साथ 108 पीपल के पेड़ का पूजन कर सकती हैं। इस जगह की इतनी लोकप्रियता है कि दूर दराज से लोग यहां पीपल पूजने के लिए आते हैं। इसके ठीक सामने कपिल क्रीड़ा उद्यान विकसित किया गया है, जहां लोगों के व्यायाम के उपकरण लगाए गए हैं।

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