






बीकानेर Abhayindia.com दिल्ली रेसकोर्स तक बीकानेर का परचम फहराने वाले विख्यात घुड़सवार जेठमल भाटी का मंगलवार को निधन हो गया है। नत्थूसर बास निवासी स्व. जेठमल भाटी की 75 वर्षों की जीवन यात्रा सेवा, साहस, संस्कार और संवेदनशीलता का अद्वितीय संगम रही। वे केवल समाजसेवक नहीं, बल्कि पीडि़त मानवता के सच्चे संरक्षक थे। हड्डी रोगों के पारंपरिक ज्ञान में उन्हें विलक्षण दक्षता प्राप्त थी। छोटे बच्चों की हसली (कॉलर बोन), मोच अथवा वर्षोंं पुराने असहनीय दर्द भाटी के स्नेहिल स्पर्श और अनुभवजन्य उपचार से ठीक हो जाते थे।
उनका प्रतिदिन लगभग 40-50 मरीजों को नि:शुल्क देखना उनके जीवन का नियमित तप था। दूर-दराज़ से लोग आशा लेकर आते और संतोष व स्वास्थ्य लेकर लौटते। वे प्रकृति के उपासक और राजस्थान के विख्यात घुड़सवारों में अग्रणी रहे। अस्सी के दशक में वे उस समय के एकमात्र ऐसे घुड़सवार थे जिन्होंने दिल्ली रेसकोर्स में घोड़े दौड़ाकर बीकानेर का परचम लहराया। उनका साहस, संतुलन और आत्मविश्वास युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। कला के क्षेत्र में भी वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे। मात्र 8 वर्ष की आयु में परंपरागत रम्मत में ‘राजा हरिश्चंद्र” की भूमिका निभाकर उन्होंने अपने अभिनय जीवन की शुरुआत की और सत्य, संवेदना तथा भावपूर्ण अभिव्यक्ति से पूरे प्रदेश में अपनी पहचान स्थापित की। गौरतलब है कि स्व. जेठमल भाटी कम्यूनिटी वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष कन्हैयालाल भाटी के पिता थे।


