






बीकानेर Abhayindia.com मुरलीधर व्यास नगर के सेक्टर-3 D में लगभग 22 लाख रूपयों की लागत से पार्क का जीर्णोंद्धार हुआ है। इस पार्क में कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब हैं कि अभी तक तीन माह का रख रखाव का समय पूर्ण नहीं हुआ इससे पहले ही भ्रमण पथ पर लगाए गए सीमेंट के ब्लाॅक जमीन में धंसने लग गए हैं तथा ब्लॉक के नीचे गढ्ढे नजर आ रहे हैं। इसके कारण राह चलते लोगों के ठोकर लगने और गिरने की संभावना बढ़ गई है, जिससे गंभीर दुर्घटना भी हो सकती है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि न तो गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग किया गया है और न ही निर्माण के समय मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ऐसी निम्न गुणवत्ता के कार्य होने से तो कोई लाभ नहीं है, बीडीए के जिन इंजीनियरों ने ऐसे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया हैं उनके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए तथा यदि ठेकेदार का भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतना को कार्य की गुणवत्ता के अभाव में रोकना चाहिए। इस पार्क के लोहे के गेट जो पूर्व में टूटे हुए थे ठेकेदार द्वारा उनकी रिपेयरिंग भी नहीं करवाई गई हैं। इस कारण दूब घास को नुकसान हो रहा है।
लोगों का कहना है कि उक्त कार्य का निरीक्षण करने वाले अभियंताओं द्वारा यदि सही प्रकार से निगरानी की गई होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। इससे प्रतीत होता है कि या तो निरीक्षण में लापरवाही बरती गई या गुणवत्ता संबंधी खामियों को अनदेखा किया गया। इसके अतिरिक्त, पार्क के मुख्य लोहे के गेट, जो पूर्व से ही क्षतिग्रस्त थे, उनकी मरम्मत या परिवर्तन भी ठेकेदार द्वारा नहीं करवाया गया है। गेट ठीक नहीं होने के कारण स्थानीय निवासी भी पार्क का उपयोग करने में असुविधा महसूस कर रहे हैं।
लोगों ने ये की मांग...
- इस पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच करवाई जाए।
- जिन अभियंताओं/अधिकारियों द्वारा इस कार्य का निरीक्षण एवं स्वीकृति दी गई है, उनकी जिम्मेदारी निर्धारित कर उनके विरुद्ध आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- यदि ठेकेदार का भुगतान पूर्ण नहीं हुआ है तो कार्य की गुणवत्ता सुधारने तथा सभी खामियों को दूर करने तक भुगतान रोका जाए।
- पार्क के प्रवेश द्वार, फव्वारे, घास एवं अन्य सुविधाओं की समुचित मरम्मत शीघ्र करवाई जाए, ताकि क्षेत्रवासी सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण में पार्क का उपयोग कर सकें।
- भविष्य में ऐसे कार्यों के लिए सख्त गुणवत्ता मानक लागू किए जाएँ, ताकि सार्वजनिक धन की बर्बादी न हो।


