Friday, April 24, 2026
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पशु हमारे मनोरंजन के लिए नहीं हैं… PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद भैंसों की अवैध लड़ाई रोकी

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राजसमंद Abhayindia.com पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स, इंडिया (PETA इंडिया) ने 30 अक्टूबर को एक जागरूक नागरिक से श्रीनाथजी मंदिर के पास नथुवास गौशाला में भैंसों की अवैध लड़ाई आयोजित किए जाने की सूचना मिलने पर राजसमंद पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर इस अवैध आयोजन को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया।

PETA इंडिया की पॉलिसी एसोसिएट चुमकी दत्ता ने कहा -“भैंसों की लड़ाई जैसे कार्यक्रम क्रूर होते हैं। भैंसों की इस लड़ाई को रोकना इस बात को दर्शाता है कि पशुओं की सुरक्षा में जनता की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हम राजसमंद पुलिस और जिला प्रशासन, विशेष रूप से ममता गुप्ता (IPS), पुलिस अधीक्षक, राजसमंद, दिनेश सुखवाल, उप पुलिस अधीक्षक, नाथद्वारा और मोहन सिंह, थाना प्रभारी, श्रीनाथजी मंदिर थाना की सराहना करते हैं जिन्होंने तत्काल कार्यवाई करके यह मजबूत संदेश दिया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

ऐसे प्रदर्शन, जिनमें पशुओं को आपस में लड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, न केवल स्वभाव से क्रूर और हिंसक होते हैं, बल्कि अवैध भी हैं। लड़ाई में इस्तेमाल किए जाने वाले पशु अत्यधिक पीड़ा सहते हैं, उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें लगती हैं और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इन पशुओं को हमला करने के लिए प्रेरित करने वाली अमानवीय प्रशिक्षण प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। जब उनका उपयोग नहीं किया जाता, तब भी उन्हें लगातार शारीरिक यातना, बंधे रहने या खराब परिस्थितियों में पिंजरों में कैद रहने की यातना सहनी पड़ती है।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत पशुओं को आपस में लड़ाने या लड़ाई के लिए उकसाने पर प्रतिबंध है। साल 2014 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में याचिकाकर्ताओं, PETA इंडिया और भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड (जो सरकार की परामर्शदात्री संस्था है) के पक्ष में फैसला सुनाते हुए यह कहा कि बैलों की लड़ाई, कुत्तों की लड़ाई या मनुष्यों और अन्य पशुओं के बीच किसी भी प्रकार की मनोरंजन के लिए आयोजित लड़ाई को समाप्त किया जाना आवश्यक है।

भैंसों की लड़ाई में दो भैंसों को एक-दूसरे के खिलाफ हिंसक लड़ाई लड़ने के मुकाबले में उतारा जाता है। इन पशुओं को तब तक मारा और उकसाया जाता है जब तक कि उनमें से एक को विजेता घोषित न कर दिया जाए। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल मनोरंजन या जुए के लिए पशुओं में हिंसा भड़काना होता है। इन घटनाओं के दौरान पशुओं को गंभीर शारीरिक और मानसिक क्षति झेलनी पड़ती है जिनमें हड्डियों का टूटना, घाव, अत्यधिक तनाव, और कई बार मृत्यु तक शामिल होती है। PETA इंडिया, जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु हमारे मनोरंजन के लिए नहीं हैं” स्पीशीज़िज़्म (प्रजातिवाद) अर्थात मनुष्यों को अन्य प्रजातियों से श्रेष्ठ मानने वाली सोच का विरोध करता है।

By- Anish Saxena Datta

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