Saturday, May 2, 2026
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एमएलए व्‍यास ने संजोया आरयूबी का सपना, कौन लगा रहा योजना को पलीता? पढ़ें- परदे के पीछे की इनसाइड स्टोरी…

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बीकानेर/आचार्य ज्योति मित्र Abhayindia.com बीकानेर में जनता की सबसे बड़ी कोटगेट रेलवे फाटकों की समस्या का समाधान करने के लिए सांखला फाटक अंडरपास और कोटगेट पर आरयूबी (अंडरब्रिज) बनने हैं, लेकिन इसके लिए ओर तो कोई तैयारी हो ना हो लेकिन नौकरशाही की अंडरपास की राजनीति जरूर शुरू हो गई है। नौकरशाही किसके इशारे पर ये काम कर रही है इस पर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

जानकार प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस काम के लिए 8 मई 25 को टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता बीकानेर के कार्यालय से 638.76 लाख रुपए की लागत से तैयार होने वाले कोटगेट आरयूबी के लिए बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर दी गई थी। जिसमें कार्य को पूर्ण करने के लिए 9 माह का समय दिया गया।

आपको बता दें कि यदि सब कुछ सही चलता तो आगामी फरवरी-मार्च तक कोटगेट आरयूबी बनकर तैयार हो जाता। लेकिन, तय दर से अधिक दर आने पर ठेका फर्म से बिना कोई नेगोसिएशन किए वापस फाइल राज्य सरकार के पाले में डाल दी गई। अब राज्य सरकार इस पर कब तक निर्णय लेगी तब तक जनता की उम्मीदों पर पानी फिरता जा रहा है।

बताते है कि कोटगेट क्रॉसिंग समस्या के स्थाई समाधान के लिए पहली बार किए गए जमीनी प्रयासों को अफसरों के फाइल पास-पास के खेल से भाजपा का एक तबका खार खाए बैठा है। यहां यह गौरतलब है कि बीकानेर पश्चिम से विधायक जेठानंद व्यास अपनी चुनावी सभाओं व बाद में कई बार दोहरा चुके है कि वे रेल फाटकों की समस्या का स्थाई समाधान निकालेंगे। टेंडर व जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तक आने से आशा के दीप जलाने लगे उसी समय नौकरशाही के फाइल पास के खेल से जनता की उम्मीदों को पलीता लगता नजर आ रहा है।

शहर के सियासी हलकों में यह सवाल उछल रहा है कि वो कौन है जो सिस्टम को नियमों की आड़ में कुछ भी करने की छूट दे रहा है। उधर, हाल ही में संगठन में सम्मान मिलने की आशा संजोए नेता व कार्यकर्ता कोई पद न मिलने पर अब इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। जिससे आम जनता में भाजपा की छवि खराब हो रही है। अरसे तक पार्टी में विभिन्न प्रमुख पदों पर रहे एक नेताजी की संदिग्ध भूमिका भी लोगों की जुबान पर है। अंदरखाने की खबर रफ़्ता रफ़्ता लोगों की जुबान से होते हुए पार्टी के आला नेताओं के पास भी गई है।

प्रशासनिक हलकों में अफवाह जोरों से है कि पार्टी की इस अंदरूनी खींचतान में कुछ अफसर नप सकते हैं। भाजपा के सूत्रों ने बताया कि संगठन में अपेक्षित स्थान न मिलने पर कई कार्यकर्ता दिल्ली के चक्कर लगा आए व कोटगेट आरयूबी को लटकाने का ठीकरा अपने ही नेताओं पर फोड़ दिया। बहरहाल, कोटगेट पर पुल तो कब बनेगा यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन भाजपा नेताओं के बीच चौड़ी हो रही खाई को पाटने लिए एक ओर पुल की जरूरत महसूस की जा रही है।

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