टाबरौं नै दूध तो ठीक है, पण आ मळाई कुण जमासी? : कोकड़दास

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Doodh Malai
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बीकानेर। बरसात के बाद पाटे पर सबसे पहले पहुंचे प्रकाश मास्टरजी ने ठंडी आह भरते हुए कहा- ‘मास्टर तो पैला ही घणै काम सूं मरयोड़ा हा अबै टाबरौ नैं दूध पावणो और पड़सी। अबै बीनै गरम कर पैला ठंडो करौ, पछे पावो, झंझट हुयग्यौ औ तो…।’ मास्टरजी कुछ और कहते उससे पहले सेठू भा बोल पड़े- ‘थानै बात्यौं आवै गोरमेंट पइसा लगासी, थानै पावण में ई जोर आ रियो है क्या? ऑंगळियों सूं हुवै जको तो धरम ले लो…।’

पाटे पर दूध की बात में उस समय उबाल आ गया जब चिंतन की मुद्रा में बैठे भैरु अचानक भड़क गए, बोले- ‘अरे औ कांयरौ धरम है दूध टाबर गरम तो पीवै कोयनी, ठंडो कर र देवणों है, अबै बता बियै दूध माथै जिकी मळाई आसी बा कुण खासी?’ भैरु के इस प्रश्न से पाटे पर एकबारगी सन्नाटा छा गया। सब के मन मे एक ही सवाल घूम रहा था कि दूध की मळाई बच्चे खाएंगे या मास्टर?

इसी बीच टोकर सा ने नई बात टोर दी- ‘भायला इयैरी बात नै छोड़ो आ मैडम मलाई आळी जग्या आपरै आदमी नै बैठाय दियो बीनै बीजेपी रो हैडमास्टर बणाय दियो तकड़ी पड़ी।’ इसी बीच ठीक सामने बैठे कजळ सा को टोकर सा का दखल बर्दाश्त नही हुआ वे फूट पड़- ओ टोकर थारी टमटम टोर अठै सूं कठै ई सुण र आयग्यो अबै अठै म्हारै सोमनै हुसयारी छोंटै, चालती रे’

इसके साथ ही थोड़ी देर के लिए पाटे पर शांति छा गई। मौन तोड़ा मंगतिया काका ने, बोले- ‘कजळ सा तूं धींगाणे गरम हुयग्यो, तूं क्यों ऐ मास्टर खासी तो आपोरै बाप रो कई लेसी। और मैडम तकड़ी हुवै या किनै लकड़ी मारै आपोने क्या? अठै रा अठै ई है रे नाई-नाई केस किता ठा पड़ जासी। बोट पडऩ आळा है दिवाळी माथै ठा पड़ जासी कतीक तकड़ी है। जे कोई ऊंच-नीच हुयगी नीं, तो बै दिल्ली आळां तो इयौं ई सोट लियोड़ा बैठा है।

अब तक रंगत जम चुकी थी। धुना महाराज बोले- ‘ऐ सोट तो खोटो दूध-घी बेचन आळौ रै पडऩा चाइजै, बा तो कैसूं ही हुवै कोयनी, गरीब नै मार है रे, थोड़ा दन पैला कोई कैवतो कै आपोरै अठै तो सैम्पल भरण आळा अफसर ही कोईनी। अबै बताओ कुण रोकसी खोटा करण आळो नैं। लूखा खावो और मजा करो। अबै बोट आयग्या जणै चिकणी बात्यों सुणो।’ -कोकड़दास (पाटै सूं लाइव)