





बीकानेर Abhayindia.com विश्व ऑटिज्म (बच्चों में आत्म केन्द्रित, एकांकीपन विकार) दिवस पर बुधवार को जस्सूसर गेट के बाहर स्थित डॉ. श्याम अग्रवाल बाल एवं शिशु रोग अस्पताल व अनुसंधान केन्द्र में बच्चों के अभिभावकों की कार्यशाला व संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि 100 में से तीन बच्चे इस रोग का शिकार होते है लेकिन अभिभावक व चिकित्सक रोग को सही पहचान नहीं कर पाने से उनका इलाज समय पर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि आटिज्म एक ऐसी स्थिति है जो मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती हैख् जिससे सामाजिक संपर्क, संचार और व्यवहार में कठिनाइयां उत्पन्न होती है। यह एक स्पेक्ट्रम विकार है, जिसका अर्थ है कि इसके लक्षण और गंभीरता व्यक्ति से व्यक्ति में भिन्न होती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान मेंं शिशु व बाल उम्र में मोबाइल बच्चों को देने से भी यह रोग बहुत से बच्चों में दिखाई देता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखे। उन्होंने कहा कि आटिज्म में बच्चों में सामाजिक संपर्क, संचार में कठिनाई व पुनरावृति व्यवहार की समस्या हो सकती है। यह बीमारी अनुवांशिक और पर्यावरणीय कारणों से हो सकती है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए चिकित्सकीय अनुसंधान जारी है। आमजन में विशेषकर अभिभावकों व शिक्षकों में जागृति आवश्यक है।





