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भारतीय समाज में सास-बहू का रिश्ता विशेष महत्व रखता है। यह संबंध केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे परिवार की समरसता और संतुलन का आधार होता है। यह रिश्ता जहां प्रेम, सहयोग और समझदारी से मजबूत होता है, वहीं कभी-कभी गलतफहमियों के कारण इसमें तनाव भी उत्पन्न हो सकता है।
झगड़े हर घर में होते हैं। सबसे ज्यादा पीड़ादायक है सास-बहू का झगड़ा। कई बार ये नोक-झोंक इतनी बढ़ जाती है कि रिश्तों में दरार आने लगती है। वास्तु ग्रन्थों में कहा गया है- “माता सती पितुश्च सती पतिस्वस्रुः सती तथा। सती कुटुंबं यत्रैव तत्रैव स्नेहमण्डितम्॥” इसका आशय है- जहाँ माता, पिता, पति और सास सभी सती (सज्जन और आदर्श) होते हैं, वहाँ पूरा परिवार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण होता है।
सास और बहू के संबंधों का महत्व परिवार की स्थिरता में निहित है। सास परिवार की बड़ी और अनुभवी सदस्य होती हैं, जो परिवार की परंपराओं और मूल्यों को संरक्षित करती हैं। वहीं, बहू नई ऊर्जा और विचारों का प्रतीक होती है, जो परिवार को नवीन दृष्टिकोण प्रदान करती है।
इस रिश्ते में यदि परस्पर सम्मान और संवाद का अभाव हो, तो संघर्ष उत्पन्न हो सकता है। सनातन ग्रन्थों में कहा गया है-“स्नेहेन विनयं कृत्वा वचनं मृदुलं सदा। सर्वेषां सुसंवादेन कुटुंबं सुसुखं भवेत्॥” इसका आशय है- स्नेह और विनम्रता के साथ मधुर वाणी और परस्पर संवाद से परिवार में सुख और शांति बनी रहती है। बहुत से घरों में देखा गया है कि सास-बहू की आपस में बिल्कुल भी नहीं बनती है। घर के वास्तु दोष पारिवारिक और मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। सही वास्तु उपाय अपनाकर सास-बहू के बीच के संबंधों को सुधारने में मदद मिल सकती है। “गृहे कलहो नास्ति वास्तु शास्त्र सिद्धिदम्। वास्तु शास्त्रे कलहो नास्ति गृहे सुखम्।” इसका आशय है- जिस घर में वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, वहां कलह और मतभेद होते हैं। और जिस घर में वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन किया जाता है, वहां सुख और शांति होती है। कुछ वास्तु दोष और उनसे बचने के हैं जिससे सास-बहू के बीच प्यार तो बढ़ेगा ही साथ में घर का माहौल भी बदल जाएगा।
वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में रखी चंदन की मूर्ति को ऐसी जगह रखने पर जहां उस पर सबकी नजर पड़ती हो सास-बहू के झगड़े कम होते हैं। घर के उत्तर-पूर्व दिशा में कूड़ेदान नहीं रखे। वास्तु के अनुसार सास को ईशान कोण में शयन नहीं करना चाहिए। इससे सास और बहू के बीच तालमेल का अभाव बना ही रहता है। इसके साथ ही दक्षिण दिशा में भी शयन करने से बचना चाहिए। लेकिन, ऐसी स्थिति बन ही जाए तो शयन करने वाली महिला को पति के बायीं ओर शयन करना चाहिए।
विगत दो माह में कई घरों के वास्तु अवलोकन का अवसर मिला उन सब मामलों में मुझे कुछ चीजें कॉमन दिखी जो सास-बहू की तकरार के लिए जिम्मेवार रही है।
केस स्टडी-1
दीपक (परिवर्तित नाम) के घर का अवलोकन किया। वह घर उत्तरमुखी था। उस घर में आग्नेय कोण में भारी निर्माण किया हुआ था तथा नैऋत्य कोण में अपेक्षाकृत निर्माण शून्य जैसा ही था। वायव्य कोण में भारी निर्माण था अतः मैंने पाया कि वहाँ पर लगातार तीन पीढ़ी से सास-बहू का संघर्ष चल रहा है।
केस स्टडी-2
मेरे परिचित रवि (परिवर्तित नाम) के घर का वास्तु अवलोकन किया। उनके घर में नई दुल्हन आई थी, अभी तो शायद उसकी मेहंदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था और सास-बहू के बीच तकरार शुरू हो गई। इससे मैं भी आश्चर्यचकित था कि ऐसा कैसे हो सकता है। तब मैंने रवि के कहने पर उनके घर का वास्तु अवलोकन किया तो पाया कि उसका घर उत्तर मुखी था। उनके घर में रसोई घर ईशान कोण में बना हुआ था जो कि वास्तु अनुकूल नहीं था। साथ ही रवि जिस कमरे में में सोता था वह भी उचित नहीं था जिसके कारण से उनके घर में अशांति की आग लगी हुई थी।
केस स्टडी-3
एक घर मैंने नवल (परिवर्तित नाम) का देखा जो पश्चिम मुखी था। इस घर में रसोई का निर्माण उचित स्थान पर नहीं था और न ही जल कुंड उचित स्थान पर था। इस घर में हमेशा सास-बहू में तकरार रही तथा एक बहू का निधन तो कैंसर से भी हुआ।
केस स्टडी-4
एक घर मैंने अजय (परिवर्तित नाम) का देखा उनका घर पूर्व मुखी था। उनके घर में जल का स्थान तथा रसोई का स्थान बिल्कुल सटकर ही था। इस घर में नैऋत्य कोण में एक अंडरग्राउंड भी था। इस मालिक के एक ही बेटा था। इन गंभीर वास्तु दोषों के कारण ऐसी अशांति उत्पन्न हुई कि बेटा बहू अलग रहने लग गए। इसी विषय पर एक प्राचीन श्लोक है- “गृहे कलहो नास्ति वास्तु शास्त्र सिद्धिदम्। वास्तु शास्त्रे कलहो नास्ति गृहे सुखम्।” इसका आशय है- जिस घर में वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, वहां कलह और मतभेद होते हैं। और जिस घर में वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन किया जाता है, वहां सुख और शांति होती है।
गृह कलह के लिए खराब वास्तु एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है। खराब वास्तु घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है, जो कलह और मतभेद को बढ़ावा देता है। यदि घर की दिशाएँ गलत तरीके से उपयोग की जाती हैं, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है और कलह को बढ़ावा देता है। यदि घर के रंग गलत तरीके से उपयोग किए जाते हैं, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है और कलह को बढ़ावा देता है। अब सवाल यह है कि इसे सुधारा कैसे जाए इसके लिए वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लेकर घर की वास्तु को सुधारा जा सकता है। इसके अलावा पूजा और अनुष्ठान करके नकारात्मक ऊर्जा को कम किया जा सकता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा सकता है। -सुमित व्यास, एम.ए (हिंदू स्टडीज़), काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, मोबाइल – 6376188431
वास्तु देवता की प्राण प्रतिष्ठा से मिलता है सुखी रहने का आशीर्वाद
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