





प्रिय अभिभावकों और मेरे प्यारे छात्रों,
इस शनिवार जब पूरा देश अपना 65वां शिक्षक दिवस मनाएगा, तो मैं एक बाल रोग विशेषज्ञ के नाते सबसे पहले अपने सभी शिक्षकों को नमन करता हूँ। हम डॉक्टर तन का इलाज करते हैं, लेकिन शिक्षक मन, मस्तिष्क और भविष्य का निर्माण करते हैं।
क्लिनिक से क्लासरूम तक : एक बाल रोग विशेषज्ञ की नज़र से : रोज़ मेरे पास सैकड़ों बच्चे आते हैं। मैं उनका वजन, ऊंचाई, टीकाकरण और बीमारी देखता हूँ।
लेकिन एक बात मैंने 25 साल में सीखी है बच्चे का सबसे बड़ा “विटामिन” उसका शिक्षक होता है। एक बच्चा जो कुपोषित है, उसे मैं दवा दे सकता हूँ। लेकिन जो बच्चा आत्मविश्वास से भरा है, जिज्ञासु है, अनुशासित है उसके पीछे अक्सर एक अच्छा शिक्षक होता है।
स्कूल में बच्चा दिन के 6-7 घंटे बिताता है इस दौरान शिक्षक ही तय करता है कि बच्चा :
– कैसे खाएगा : लंच बॉक्स में क्या लाएगा, पानी पिएगा या कोल्ड ड्रिंक
– कैसे सोचेगा : सवाल पूछेगा या चुप रहेगा
– कैसे जिएगा : खेल के मैदान में टीम भावना सीखेगा या मोबाइल में खो जाएगा
इसलिए मेरे लिए शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी से कम नहीं हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से हमने क्या सीखा। डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था – “शिक्षकों को समाज में सबसे अच्छा स्थान मिलना चाहिए। आज 65 साल बाद भी यह बात उतनी ही सच है।
एक शिक्षक केवल किताब नहीं पढ़ाता। वो :
1. पहला डायग्नोसिस करता है : ये बच्चा आज उदास क्यों है?”
2. पहला टीका लगाता है : असफलता से डरो मत” का टीका
3. पहली दवा देता है : तुम कर सकते हो, का हौसला
बीकानेर के संदर्भ में : हमारे गुरु, हमारी धरोहर
बीकानेर में मैंने देखा है कि सरकारी स्कूल के शिक्षक कम संसाधनों में भी कमाल कर रहे हैं। वे बच्चों को बाजरा, दाल और मौसमी फल खाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे असेंबली में “हाथ धोना” और “साफ पानी पीना” सिखाते हैं। यही तो असली “Preventive Pediatrics” है।
माता-पिता के लिए मेरा संदेश इस शिक्षक दिवस पर
1. शिक्षक को सहयोगी बनाएं, प्रतिद्वंदी नहीं : “सर ने ये क्यों कहा” की जगह “सर ने ऐसा क्यों कहा होगा” पूछें
2. बच्चे को स्क्रीन से नहीं, शिक्षक से जोड़ें : हर हफ्ते 10 मिनट शिक्षक से बात करें
3. शिक्षक का सम्मान करें : क्योंकि बच्चा वही सीखता है जो वो देखता है
इस शिक्षक दिवस पर मेरी प्रार्थना है :
हर क्लासरूम में एक ऐसा शिक्षक हो जो बच्चे की भूख भी समझे और उसके सपने भी। हर बच्चे को ऐसा गुरु मिले जो उसे नंबर नहीं, इंसान बनना सिखाए। क्योंकि “आज की क्लासरूम, कल का हॉस्पिटल, कल का भारत तय करती है।” आइए, इस शनिवार हम सब अपने पहले गुरु को धन्यवाद कहें। एक मैसेज, एक कार्ड, या सिर्फ “धन्यवाद सर/मैम”। “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय।” -डॉ. श्याम अग्रवाल, एमडी पीडियाट्रिक्स, बाल रोग विशेषज्ञ एवं नवजात रोग विशेषज्ञ, बीकानेर







