






बीकानेर abhayindia.com कोरोना आपदा के कारण महिनेभर से लॉकडाउन की पीड़ा झेल रहे बीकानेर वासियों के लिये राज्य सरकार की ओर से लागू किया मोडिफाइड लॉकडाउन का पहला दिन असमंजस ही बीत गया। वहीं, जो राजकीय दफ्तर खोले गये वहां कर्मचारियों की उपस्थिति भी कम रही और कामकाज भी ठप्प सा रहा है।
मॉडिफाइड लॉकडाउन के लिये दुकानें, प्रतिष्ठान और फैक्ट्रियां वगैरहा खोलने के लिये ऑनलाइन पास जारी की प्रक्रिया को लेकर एडवाइजरी स्पष्ट नहीं होने के कारण कई व्यवसायी और प्रतिष्ठान संचालक पास बनाने के लिये इधर-*उधर संपर्क करते रहे। वहीं मोडिफाइड लॉक डाउन में अनुमति पत्र लेने की प्रक्रिया उन लोगों के लिये के समझ से बाहर हो गई जो ऑनलाइन नेटवर्किग नहीं जानते है।
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जानकारी में रहे कि मोडिफाइड लॉक डाउन में जिस वर्ग के लोगों को अपना व्यवसाय करने की छूट दी गई है, उनमें से अधिकांश ऐसे हैं, जिन्हें कम्प्यूटर ऑपरेट करना नहीं आता है। अगर ये लोग अपने मोबाइल पर भी साइट को ओपन करके करना चाहे तो दस्तावेज कैसे अपलोड करेंगे, यह भी बड़ी समस्या है, क्योंकि बहुत सारे लोगों के पास तो इतने दस्तावेज होंगे ही नहीं।
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इन सबसे पहले इन्हें एसएसओ आईडी बनवानी होगी, जो ई-मित्र सेवा देने वालों के पास ही होती है, जन सामान्य, जिसे कम्प्यूटर का भी ज्ञान हो, उसके लिए भी एसएसओ आईडी बनाना संभव नहीं होगा। ऐसे में अगर ईमित्र वाले भी सेवाएं देंगे तो कैसे कोरोना और लॉक डाउन की एडवाइजरी के चलते यह सम्भव होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जल्दबाजी में शुरू की गई इस प्रक्रिया का लाभ लेने के लिए कहीं लोगों को आर्थिक मार नहीं सहनी पड़ जाए, यह बड़ी आशंका है।
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अफसरों से सीध बैठाने पर रहा जोर
मॉडिफाइड लॉकडाउन के लिये अनुमति पत्र जारी करने के लिये जिन अधिकारियों को अधिकृत किया गया उनसे संपर्क कर सीध बैठाने के लिये जरूरमंदों को अपने नजदीकी नेताओं से संपर्क साधना पड़ा। हकीकत तो यह रही कि अनुमति पत्र जारी करने की एडवाइजरी समझ में नहीं आने के कारण कई अधिकृत अधिकारी अनुमति पत्र जारी करने से कन्नी काटने में लगे हुए थे।
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जानकारी में रहे कि जिला प्रशासन ने रविवार को एक प्रेस नोट जारी कर अवगत कराया था कि मॉडिफाइड लॉकडाउन गतिविधियों के लिए आवश्यक होने पर पास राजकोप सिटीजन एप या आनलाइन आवेदन कर संबंधित विभागों से पास प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिये जिला पुलिस अधीक्षक समेत 12 से अधिक अधिकारियों को पास जारी करने के लिए अधिकृत किया है। इन अधिकारियों को अनुमति पत्र के लिये प्राप्त होने वाले आवेदनों की समीक्षा कर उनके निस्तारण करने का अधिकार दिया गया है। बताया जाता है कि अनुमति पत्र के लिये ऑनलाइन प्रक्रिया जटिल होने के कारण ज्यादातर लोगों उलझन में फंसे हुए है।


