भागवत का सार भगवान में भक्ति रखो : महंत क्षमाराम

Kshamaramji maharaj
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बीकानेर Abhayindia.com भागवत कथा का सार यह है कि भगवान की भक्ति होनी चाहिए। भगवान का चिंतन करना चाहिए। भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। सींथल पीठाधीश्वर महंत क्षमाराम महाराज ने शनिवार को गोपेश्वर भूतेश्वर महादेव मंदिर में चल रही पाक्षिक श्री मद्भागवत कथा के अंतिम दिन भागवत कथा का सार बताया।

भागवत कथा सुनने के लाभ और कथा क्यों और किसलिए सुननी चाहिए, यह जानकारी भक्तों को दी। महंतजी ने कथा सुनने के बाद परीक्षित के ह्रदय में आए परिवर्तन की व्याख्या की, भगवान श्रीकृष्ण के अंतिम समय में शिकारी के हाथों से बाण लगने और महाप्रयाण हो जाने, इससे पूर्व दारुक द्वारा द्वारिका में सभी को सावधान कर द्वारिका डूबने से पहले वहां से चले जाने का संदेश भिजवाने का वृत्तांत सुनाया। साथ ही बताया कि जैसे ही भगवान का महाप्रयाण होता है वहां से कलयुग के काल की शुरुआत हुई।

महंतजी ने कलयुग की विशेषता बताई और कहा कि कलयुग की पराकाष्ठा पर भगवान विष्णु कलकी के रूप में अवतार लेंगे, पापियों का संहार करेंगे और सतयुग आएगा। इससे पूर्व महंत क्षमारामजी ने यज्ञ के बारे में बताया कि एक आहूति पर यज्ञ होता है और एक स्वाध्याय यज्ञ होता है जो आप कर रहे हैं, वह स्वाध्याय यज्ञ है। द्रव्य यज्ञ पर वर्तमान में हो रहे अशुद्धियां पर चिंतन करते हुए कहा कि अब शुद्ध द्रव्य नहीं मिलता, घी तो छोड़ो गाय का पोटा तक शुद्ध नहीं मिलता। वर्ण संकर्ण हो गया है। पाश्चात्य संस्कृति ने देश का नुकसान कर दिया है। हर आदमी के मन में बस पैसा होना चाहिए। ऐसी भावना हो गई है। पाप करते रहते हैं। ज्ञान यज्ञ में भावना की पवित्रता चाहिए, द्रव्य यज्ञ में देशी गाय का शुद्ध घी चाहिए। मंत्र स्थल भी शुद्ध होना चाहिए। यजमानों का शुद्ध मिलना कठिन होता है।

हवन-पूजन का कार्यक्रम रविवार को

श्री गोपेश्वर भूतेश्वर महादेव मंदिर गोपेश्वर बस्ती में चल रही पाक्षिक श्री मद्भागवत कथा का समापन शनिवार को हुआ। रविवार को हवन-पूजन एवं गीता पाठ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन से जुड़े गोपाल अग्रवाल ने बताया कि सुबह 9 बजे से हवन तत्पश्चात पूजन और बाद में गीता पाठ किया जाएगा। सोमवार से नौ दिवसीय नवाह्न परायण पाठ शुरू होगा।