Friday, June 5, 2026
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राजस्‍थान में मंदिर को तोड़ने के मामले में कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर तेज, आखिर किसने…

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जयपुर Abhayindia.com अलवर के राजगढ़ में आज प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ने के मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। दोनों इस मामले में एकदूसरे को कसूरवार ठहरा रहे हैं।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने प्रेस वार्ता में कहा कि राजगढ़ का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें स्थानीय विधायक जौहरी लाल मीणा कहते नजर आ रहे हैं कि सभी 34 पार्षद 24 घंटे में नतमस्तक हो जाएं तो घरों और मंदिरों को नहीं टूटने दिया जाएगा। इससे साफ है कि विधायक और सरकार की सरपरस्ती में ही मंदिर को तोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि जहां तक सितंबर, 2021 में बोर्ड से प्रस्ताव पास होने की बात है तो उसमें कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि मंदिर पर बुलडोजर चला दिया जाए।

राठौड़ ने कहा कि मास्टरप्लान को अंतिम रूप देने का काम सरकार करती है। नोटिस उपखंड अधिकारी ने जारी किया, जिसके लिए उन्होंने जिला कलेक्टर से आदेश दिए और जिला कलेक्टर ने उच्चाधिकारियों से यह आदेश लिया। इससे साफ है कि घटना सरकार के संज्ञान में है। भाजपा राज में मंदिर तोड़ने के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि हमारे समय में मंदिर को तोड़ा नहीं बल्कि विस्थापित किया गया था। राठौड़ ने साफ किया कि भाजपा ने एक कमेटी बनाई है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद हम आगे कार्रवाई करेंगे। उन्होंने अलवर की मॉब लिंचिंग और मूकबधिर के साथ जौहरी लाल मीणा के पुत्र पर लगे रेप के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों पर हमला बोला और कहा कि अधिकारी प्रवक्ता की भाषा बोल रहे हैं। वो भूल गए हैं कि जब वापस बदलाव का समय आएगा तब ये सारे सवाल फिर खड़े होंगे और इन्हीं अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।

राजगढ़ में मंदिर को तोड़ने के मामले में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि धार्मिक स्थलों को हटाने के मामले में उच्च स्तर पर मामले को संज्ञान में लाया जाता है। लेकिन सरकार को इस मामले में कोई जानकारी नहीं मिली। फिर भी हमने राजगढ़ नगर पालिका के ईओ को नोटिस देकर 3 दिन में इसकी पूरी रिपोर्ट मांगी है। धारीवाल ने कहा कि राजगढ़ नगर पालिका में भाजपा के बोर्ड और चेयरमैन सतीश दुहारिया ने ही बोर्ड बैठक में मेला चौराहा से गोल चक्कर तक के मुख्य रास्ते से गौरव पथ में अवैध अतिक्रमण हटवाने का प्रस्ताव पारित किया था। इसकी राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई। यही नहीं, 17 और 18 अप्रेल को ना तो कोई वैध निर्माण तोड़ा गया और ना ही किसी तरह का विरोध सामने आया। अतिक्रमण हटाने के दौरान दो पूर्व निर्मित मंदिरों पर कार्रवाई की गई। इनमें नाले पर बनाए गए निजी मंदिर की मूर्तियों को निर्माणकर्ताओं ने कार्रवाई से पहले ही हटा लिया था। दूसरे मंदिर का भी कुछ हिस्सा ही हटाया गया है। गर्भग्रह पूर्णतया सुरक्षित है।

कांग्रेस के प्रदेशाध्‍यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस वार्ता में मंदिर को तोड़ने का काम हमने नहीं भाजपा के नगर परिषद अध्यक्ष सतीश दुहारिया ने किया है। भाजपा बोर्ड ने 8 सितम्बर 2021 में बोर्ड मीटिंग में मंदिर को हटाने का प्रस्ताव पास किया था। इसे तोड़ने का प्रयास भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार वसुंधरा राजे के समय भी हुआ था। मगर पूरे मामले में भाजपा और आरएसएस के लोग गलत प्रचार कर रहे हैं।

उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस को बदनाम करने का हमेशा भाजपा का एजेंडा रहा है। जबकि, पूर्ववर्ती भाजपा के समय भी जयपुर में भी मंदिर हटाए गए थे। भाजपा और आरएसएस धार्मिक उन्माद फैलाकर वोट बटोरने की कुचेष्टा हमेशा करते हैं। डोटासरा ने कहा कि भाजपा का वहां सर्वसम्मति से बोर्ड है ओर मंदिर हटाने के लिए पूरी तरह भाजपा जिम्मेदार है। हम कभी धार्मिक आस्था के साथ छेड़छाड़ नहीं करते हैं। वो भाई से भाई को लड़ाकर राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं, इनकी कथनी और करनी में अंतर है। राजगढ़ की घटना की जिम्मेदारी भाजपा को लेनी चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। डोटासरा ने कहा कि हम मंदिर की मूर्तियां वापस स्थापित कराएंगे।

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